EVM को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट के बाहर वकीलोंका प्रदर्शन; पेपर बैलेट की मांग
Delhi : दिल्ली में वकीलों और लों कार्यकर्ताओं ने EVM व्यवस्था पर सवाल उठाए। EVM और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर वकीलों और लों कार्यकर्ताओं ने 10 अक्टूबर को जंतर – मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठनेका ऐलान किया। दिल्ली में वकीलों और लों कार्यकर्ताओं ने EVM के इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट के पास जुटे और पेपर बैलेट व्यवस्था की वापसी की मांग की।
इस दौरान चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन 17 सितंबर को हुए प्रदर्शन मेंशामिल वकीलों और लों कार्यकर्ताओं ने कहा कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसेसेजुड़े मुद्दों पर च द्दों र्चा जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने EVM की जगह पारंपरिक पेपर बैलेट से मतदान करानेकी मांग रखी। यह मांग प्रदर्शनकारियों की ओर से की गई है।
10 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर धरना
आंदोलन सेजुड़े आयोजकों ने 10 अक्टूबर सेजंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया है। प्रस्तावित आंदोलन के जरिए EVM के खिलाफ अभियान चलाने और पेपर बैलेट की वापसी की मांग को आगे बढ़ानेकी बात कही गई है।
EVM-VVPAT पर चुनाव आयोग का पक्ष
वहीं, हीं चुनाव आयोग मौजूदा चुनाव व्यवस्था में EVM के साथ VVPAT का इस्तेमाल करता है। आयोग के अनुसार, मतदान के बाद VVPAT की पारदर्शी स्क्रीन पर उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न वाली पर्ची करीब 7 सेकंड तक दिखाई देती है। आयोग के मुताबिक EVM और VVPAT की जांच, रैंडमाइजेशन और चुनाव प्रक्रिया सेजुड़े विभिन्न चरणों में उम्मीदवारों और रों राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी का भी प्रावधान है।
EVM पर आमने-सामने दलीलें
एक तरफ प्रदर्शनकारी पेपर बैलेट को अधिक पारदर्शी व्यवस्था बताते हुए उसकी वापसी की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग EVM-VVPAT व्यवस्था को लेकर अपने तकनीकी और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों पर यों जोर देता है। इसी वजह से EVM और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









