लद्दाख बंद का आह्वान: ‘22 मई के समझौते से पीछे हट रही है केंद्र सरकार’
लद्दाख के नागरिक समाज संगठनों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि 22 मई को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय और नागरिक समाज समूह की छह सदस्यीय समिति के बीच हुई बैठक में दिए गए आश्वासनों से पीछे हट रही है. जिसमें एक चुने हुए मुख्यमंत्री के तहत विधानसभा बनाकर राज्य का दर्जा देने की मांग को पूरा करने पर सहमति बनी थी|
लेह एपेक्स बॉडी के को-चेयरमैन शेरिंग दोरजे लाक्रूक (बाएं), कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रमुख असगर अली करबलाई (बाएं से दूसरे), पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (दाएं से दूसरे) और अन्य लोग, जो 22 मई, 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक में शामिल हुए. (फोटो: अरेंजमेंट)
नई दिल्ली: लद्दाख के नागरिक समाज संगठनों ने 23 जून को बंद का आह्वान किया है. उनका आरोप है कि केंद्र सरकार 22 मई को लिए गए निर्णयों से ‘पीछे हट रही है’ और बैठक के सहमत मिनट्स जारी करने में देरी कर रही है|
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के अध्यक्ष त्सेरिंग दोरजे लाक्रूक ने शनिवार (20 जून) को करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के सदस्यों के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमने 23 जून को लद्दाख में पूर्ण बंद का आह्वान किया है. सभी दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे. केवल परिवहन सेवाओं को अनुमति दी जाएगी क्योंकि पर्यटन का मौसम चल रहा है.’
लाक्रूक ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 22 मई को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय और नागरिक समाज समूह की छह सदस्यीय समिति के बीच हुई बैठक में दिए गए आश्वासनों से पीछे हट रही है|
उन्होंने कहा, ‘22 मई को गृह मंत्रालय की उप-समिति कुछ फैसलों पर सहमत हुई थी. हालांकि बाद में बैठक की मिनट्स में यह बात नहीं दिखी. यह चिंता की बात है. केंद्र को बैठक के मिनट्स जारी करने चाहिए और उसमें लिए गए फैसलों को उसमें दर्ज करना चाहिए. केंद्र को 22 मई के फैसलों पर कायम रहना चाहिए. हमें केंद्र की मंशा पर संदेह है. ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम एक कदम आगे बढ़ें और फिर दो कदम पीछे हट जाएं.’
लाक्रूक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह दलाई लामा की आगामी दो महीने की लद्दाख यात्रा को ‘फैसलों को लागू करने में देरी के बहाने’ के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है|
उन्होंने कहा, ‘अगर केंद्र यह सोचता है कि दलाई लामा की लद्दाख यात्रा हमें चुप करा देगी, तो वह गलतफहमी में है. इस दो महीने के दौरे की आड़ में हमें डर है कि एक के बाद एक ऐसे फैसले लिए जाएंगे जिनसे लद्दाख को बेच दिया जाएगा. हमें पता है कि बंद दरवाजों के पीछे क्या हो रहा है.’
केडीए के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने कहा कि 22 मई की बैठक में ‘एक चुने हुए मुख्यमंत्री के तहत विधानसभा बनाकर’ राज्य का दर्जा देने की मांग को पूरा करने पर सहमति बनी थी|
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, करबलाई ने कहा, ‘सैद्धांतिक रूप से यह सहमति बनी कि स्थानीय लोगों से जुड़े मामलों पर विधायिका के पास कार्यकारी, विधायी और वित्तीय शक्तियां होंगी.’
करबलाई ने यह भी दावा किया कि संविधान के अनुच्छेद 371ए, एफ और जी के तहत लद्दाख को विशेष शक्तियां देने पर सहमति बनी, जैसा कि इन प्रावधानों में गारंटी दी गई है|
उन्होंने कहा, ‘हमें बताया गया था कि इन अनुच्छेदों के तहत सबसे अच्छे प्रावधानों को लद्दाख के लिए प्रस्तावित अनुच्छेद 371K में शामिल किया जाएगा. यह भी आश्वासन दिया गया था कि मुख्य सचिव सहित नौकरशाही को कार्यपालिका के अधीन लाया जाएगा. हमें बताया गया था कि बैठक का विवरण कुछ दिनों में जारी कर दिया जाएगा, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ है.’
लद्दाख की सांसद हनीफा जान और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस बैठक में शामिल हुए थे, जहां 23 जून के बंद के आह्वान को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी.
द वायर ने पहले रिपोर्ट किया था कि 22 मई को नागरिक समाज संगठनों ने कहा था कि यह सहमति गृह मंत्रालय की एक उप-समिति की बैठक के दौरान बनी थी, जिसमें एलएबी और केडीए के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे|
हालांकि, 23 मई को एलएबी के संयोजक गेलेक फुंचोक ने कहा था कि भले ही यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण सफलता थी, फिर भी दोनों संगठन गृह मंत्रालय से औपचारिक लिखित सूचना का इंतजार कर रहे थे|
सौजन्य :द वायर
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