पटियाला गांव में दलित परिवारों ने सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाया, जांच के आदेश दिए गए
पटियाला: पटियाला की नाभा तहसील के चत्थे गांव में अनुसूचित जाति (एससी) परिवारों को सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा, इस आरोप की जांच के आदेश दिए गए हैं। यह बहिष्कार गांव की साझा जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद जातिगत अधिकारों के विवाद में तब्दील हो गया था।
चत्थे गांव के निवासी हरमीत सिंह ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) और पटियाला के उपायुक्त को शिकायत सौंपी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि दलित परिवारों को पंचायत शामलात में अपने वैधानिक हिस्से की मांग करने पर भेदभाव, उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। शिकायत के अनुसार, अनुसूचित जाति के परिवारों को गांव की लगभग 115 एकड़ शामलात (साझा भूमि) के एक तिहाई हिस्से का अधिकार था। हरमीत ने आरोप लगाया कि इन परिवारों को चारा, खेती योग्य भूमि और अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। हरमीत ने TOI को बताया, “जमींदारों ने दलित परिवारों को हरा चारा उगाने के लिए जमीन पट्टे पर देने से इनकार कर दिया है और उन्हें गेहूं के अवशेष या पशुओं के लिए खेतों से चारा इकट्ठा करने से भी रोक दिया है। इस बहिष्कार ने आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है और कई परिवारों को पशुओं के चारे की व्यवस्था करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।”
बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। शिकायत के अनुसार, अनुसूचित जाति के परिवारों को गांव की लगभग 115 एकड़ शामलात (साझा भूमि) के एक तिहाई हिस्से का अधिकार था। हरमीत ने आरोप लगाया कि इन परिवारों को चारा, खेती योग्य भूमि और अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। हरमीत ने TOI को बताया, “जमींदारों ने दलित परिवारों को हरा चारा उगाने के लिए जमीन पट्टे पर देने से इनकार कर दिया है और उन्हें गेहूं के अवशेष या पशुओं के लिए खेतों से चारा इकट्ठा करने से भी रोक दिया है। इस बहिष्कार ने आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है और कई परिवारों को पशुओं के चारे की व्यवस्था करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।”
सौजन्य :टाइम्स ऑफ़ इंडिया
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