संथाली को प्रथम राजभाषा का दर्जा नहीं देने का विरोध
तेनुघाट/ललपनिया (बेरमो) : संथाली को संविधान के अनुच्छेद-345 के तहत झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा नहीं देने के प्रति विरोध जताते हुए आदिवासी सेंगेल (सशक्तीकरण) अभियान की ओर से शुक्रवार को पेटरवार प्रखंड की चांपी पंचायत के जेरकाटांड़ ग्राम व गोमिया प्रखंड की खंभरा पंचायत के शहर टोला में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका गया।
यहां उपस्थित आदिवासियों का नेतृत्व सेंगेल अभियान के बोकारो जिला सेंगेल टावर जयराम सोरेन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज पूर्व घोषित आंदोलन के तहत भारत के पांच प्रदेशों झारखंड, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल व ओडिशा के विभिन्न स्थानों में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया। सेंगेल अभियान के बोकारो जोनल हेड आनंद टुडू ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार दुनिया के लगभग 7000 भाषाओं में 40 फीसद भाषा जल्द ही विलुप्त होने वाली है। क्योंकि उन भाषा का उपयोग पठन-पाठन, सरकारी कार्य, व्यवसाय, संचार-संवाद आदि में नहीं हो रहा।
भारत की सर्वाधिक बड़ी आदिवासी भाषा संथाली है, जो राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त (आठवीं अनुसूची में शामिल) है। फिर भी संथाली भाषा को संविधान के अनुच्छेद-345 के तहत झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा अब तक नहीं दिया गया है, जो झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आदिवासी भाषा विरोधी मानसिकता का परिचायक है। जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पांच अगस्त-2020 और 14 अक्टूबर-2020 को ही झारखंड राज्य की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में अनापत्ति प्रमाणपत्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मिल चुका है।
इसके बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि बाहरी भाषाओं को झारखंड में जबरन थोप रहे हैं। मौके पर चांपी पंचायत के सेंगेल टावर कार्तिक हंसदा सहित अमृत सोरेन, मनोज हेम्ब्रम, विक्रम मरांडी, रामेश्वर मुर्मू, प्रेम मुर्मू, रासमुनी सोरेन, पार्वती सोरेन, खुशबू सोरेन, ढिनी सोरेन, सुरजमुनी सोरेन, रवींद्र सोरेन, दुर्गा सोरेन, आकाश सोरेन, सुलेंद्र सोरेन आदि उपस्थित थे। वहीं गोमिया के खंभरा में विभा हांसदा, राहुल हांसदा सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।
सौजन्य : Dainik jagran
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