कन्नौज में सपा-भाजपा दोनों की दांव पर साख, इन सियासी समीकरणों में कौन मारेगा बाजी
लखनऊ: वैसे तो दुनिया भर में इत्रनगरी कन्नौज अपने खुशबू के कारोबार के लिए पहचान रखती है, लेकिन इस बार यह किसी अलग ही बात के लिए खूब चर्चा में रही है। असल में, विधानसभा चुनाव 2022 से ठीक पहले यहां इत्र कारोबारियों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई, जिसने इस शहर की सियासी प्रोफाइल बढ़ाने में खासी भूमिका निभाई है। विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में 20 फरवरी को कन्नौज में मतदान हो चुका है। जिले की तीन विधानसभा सीटों में से दो सीटें पिछली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तो वहीं, एक सीट समाजवादी पार्टी ने कब्जाई थी। वहीं, इस बार यहां भाजपा और सपा दोनों पार्टियों की साख दांव पर है, जिससे जिले की तीनों सीटों पर मुकाबला रोचक हुआ है।
कन्नौज सदर (सुरक्षित) विधानसभा सीट-198
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- पूर्व आईपीएस असीम अरुण
सपा- निर्वतमान विधायक अनिल दोहरे
बसपा- समरजीत दोहरे
कांग्रेस- विनीता देवी
अनुसूचित जाति (SC) के सुरक्षित सीट पर वर्ष 2002 से पहले बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे काबिज थे। लेकिन, 2002 से यानी पिछले 20 साल से यह सीट सपा के कब्जे में है। वर्ष 2002 के चुनाव में इस सीट से सपा के कल्याण सिंह दोहरे ने जीत हासिल की थी। उसके बाद विधानसभा चुनाव 2007 में सपा ने कल्याण सिंह की जगह कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे बिहारीलाल दोहरे के बेटे अनिल दोहरे को उतारा और तभी से वह लगातार यहां जीतते आ रहे हैं। वहीं, सदर सीट से भाजपा के वरिष्ठ आईपीएस असीम अरुण की किस्मत दांव पर होगी, क्योंकि उनके लिए अनिल दोहरे को हराना आसान नहीं होगा। जबकि भाजपा ने असीम अरुण को टिकट देकर दो निशाने साधे हैं, पहला वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होने का और दूसरा कि वह दलित बिरादरी से आते हैं। ऐसे में बीजेपी दलितों से जुड़ी अपनी सियासत को नई दिशा देने के प्रयास में लगी है। भाजपा जहां कन्नौज सदर सीट हर हाल में जीतना चाहती है तो वहीं, सपा इस बार भी जीतकर क्लीन स्वीप करना चाहती है। अनुसूचित जाति व ब्राह्मण मतदाता बाहुल्य कन्नौज सदर विधानसभा में लगभग 4,28,282 मतदाता हैं, जिनमें 2,28,371 पुरुष, 1,99,898 महिला और 13 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।
छिबरामऊ विधानसभा सीट- 196
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- निवर्तमान विधायक अर्चना पांडेय
सपा- पूर्व विधायक अरविंद सिंह यादव
बसपा- वहीदा बानो उर्फ जूही सुल्तान
कांग्रेस- विजय मिश्रा
आप- डॉ. चंद्रका कांत यादव
छिबरामऊ विधानसभा सीट भी सपा का गढ़ मानी जाती रही है। हालांकि, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में आई मोदी (PM Modi) लहर में इस सीट पर भाजपा की प्रत्याशी अर्चना पांडे ने जीत हासिल की। उन्होंने बसपा के ताहिर हुसैन सिद्दीकी को हराया, जबकि सपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे। इससे पहले वर्ष 2007 और 2012 में छिबरामऊ सीट पर सपा के अरविंद यादव का कब्जा रहा है। ऐसे में इस बार छिबरामऊ विधानसभा सीट पर भाजपा और सपा के बीच रोचक टक्कर है, लेकिन बसपा की वहीदा बानो इसे और रोचक बना रही हैं।
कुल मतदाता- 4,52,294
जातिगत आंकड़े (अनुमानित)
यादव- 90 हजार
मुस्लिम- 65 हजार
ब्राह्मण- 60 हजार
शाक्य- 55 हजार
अनुसूचित जाति- 55 हजार
लोधी- 35 हजार
पाल- 30 हजार
कटियार- 25 हजार
क्षत्रिय- 20 हजार
तिर्वा विधानसभा सीट- 197
विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी
भाजपा- निवर्तमान विधायक कैलाश सिंह राजपूत
सपा- अनिल कुमार पाल
बसपा- अजय कुमार वर्मा
कांग्रेस- नामांकन निरस्त
आप- गीता देवी
औरैया और कानपुर (Kanpur) देहात बॉर्डर से जुड़ी तिर्वा विधानसभा कभी तिर्वा रियासत के आखिरी राजा रहे राजा दुर्गा नारायण सिंह की विरासत की पहचान रही है। यहां से सभी बड़े दलों (भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस) ने समय-समय पर अपना परचम लहराया है। वर्ष 2012 के चुनाव में जहां सपा के विजय बहादुर पाल ने बसपा प्रत्याशी कैलाश राजपूत को हराया था तो वहीं, वर्ष 2017 में भाजपा के कैलाश सिंह राजपूत ने सपा के विजय बहादुर पाल को बड़े अंतर से मात दी थी। तिर्वा विधानसभा सीट की सबसे खास बात है कि यहां किसी एक राजनीतिक दल का कब्जा नहीं रहा और ऐसे में इस बार भी इस सीट पर नतीजे काफी दिलचस्प होने वाले हैं।
कुल मतदाता- 3,70,092
जातिगत आंकड़े (अनुमानित)
लोधी- 1.20 हजार
यादव- 65 हजार
क्षत्रिय- 45 हजार
पाल- 40 हजार
अनुसूचित जाति- 35 हजार
सौजन्य : Buziness bytes
नोट : यह समाचार मूलरूप से buzinessbytes.com में प्रकाशित हुआ है. मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है !









