पिता की हत्या के बाद भी दिल्ली में बेटा करता रहा UPSC की तैयारी, कातिलों को सजा मिलने से पहले IPS बनकर लौटा
पिता की हत्या के बाद भी दिल्ली में बेटा करता रहा UPSC की तैयारी, कातिलों को सजा मिलने से पहले IPS बनकर लौटा बजरंग प्रसाद 2023 बैच के यूपी कैडर IPS अधिकारी हैंअदालत ने नौ दोषियों को दस-दस साल सजा सुनाई प्रत्येक दोषी पर 7,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया|
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में IPS आशुतोष मिश्रा की 95 वर्षीय मां की 16 अगस्त 2026 को हुई हत्या ने लोगों को झकझोर दिया है। इसी बीच उत्तर प्रदेश में ही अंडर-ट्रेनी IPS अधिकारी बजरंग प्रसाद के पिता राजेश कुमार यादव की छह साल पुरानी हत्या का मामला फिर चर्चा में है।
बस्ती की अदालत ने इस मामले में नौ दोषियों को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 7,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
पिता की हत्या के बाद भी जारी रखी UPSC की तैयारी
बजरंग प्रसाद उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में मेरठ जिले में अंडर-ट्रेनी ASP के पद पर कार्यरत हैं। उनके जीवन की कहानी संघर्ष, धैर्य और सफलता की मिसाल है। वर्ष 2020 में जब उनके पिता राजेश कुमार यादव की हत्या हुई, उस समय बजरंग प्रसाद दिल्ली में रहकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बेटे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए उनकी मां ने उन्हें पिता के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं होने दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद बजरंग प्रसाद ने अपनी तैयारी जारी रखी। उनकी मां इस दौर में उनके लिए मजबूत सहारा बनीं।
तीसरे प्रयास में हासिल की 454वीं रैंक
2 सितंबर 1998 को जन्मे बजरंग प्रसाद ने BSc तक की पढ़ाई की है। पिता की मौत के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा अपने तीसरे प्रयास में पास की और 454वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की।
इसके बाद वह भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बने और यूपी कैडर में वर्ष 2023 बैच में शामिल हुए। पिता की हत्या के मामले में न्याय मिलने से पहले ही बजरंग प्रसाद IPS अधिकारी बनकर अपने परिवार के सपने को पूरा कर चुके थे।
खेत में विवाद के बाद हुई थी पिता की हत्या
राजेश कुमार यादव की हत्या का मामला 9 अगस्त 2020 को बस्ती जिले के कलवारी पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। मुकदमे के अनुसार, धोबहट गांव में दिनेश और उमेश खेत में चरी काट रहे थे। इसी दौरान गांव के ही जगदीश से उनका विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच लाठियां चलीं।
जब उमेश और दिनेश के सगे भतीजे यानी बजरंग प्रसाद के पिता राजेश कुमार यादव को इस विवाद की जानकारी मिली, तो वह मोटरसाइकिल से खेत की ओर जाने लगे। आरोप है कि रास्ते में पक्के पुल बांध के पास कुछ लोग घात लगाए बैठे थे। वहां राजेश कुमार यादव पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने राजेश कुमार यादव को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद बजरंग प्रसाद के भाई अंबिका प्रसाद की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
छह साल बाद अदालत ने सुनाई सजा
इस मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, बस्ती की अदालत ने नौ अभियुक्तों को गैर-इरादतन हत्या के जुर्म में दोषी माना। अदालत ने सभी नौ दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 7,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
अदालत का फैसला आने के बाद 14 अगस्त 2026 को IPS बजरंग प्रसाद ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा, “सत्यमेव जयते। आज पिताजी की हत्या के जुर्म में सभी 9 अभियुक्तों को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, बस्ती द्वारा गैर-इरादतन हत्या के जुर्म में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और उन्हें जेल भेजा गया।”
पिता को खोने का दर्द बजरंग प्रसाद के जीवन का बेहद कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने इस सदमे को अपनी मंजिल के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। मां के हौसले और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने UPSC पास की और IPS अधिकारी बने। अब छह साल पुराने मामले में नौ दोषियों को सजा मिलने के बाद उनके परिवार को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला मिला है।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









