शिमला में सफाई कर्मियों की हड़ताल से बिगड़े हालात, शहर में बदबू ने किया नाक में दम; नगर निगम ने 41 कर्मी बर्खास्त किए
शिमला नगर निगम ने एस्मा लागू होने के बावजूद हड़ताल जारी रखने पर सैहब सोसायटी के 41 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। शहर में छह दिनों से कूड़ा न उठने से गंदगी फैल रही है।
एस्मा के बावजूद हड़ताल जारी रखने पर कार्रवाई।
सैहब सोसायटी के 41 कर्मचारी बर्खास्त, 34 सुपरवाइजर।
270 आउटसोर्स कर्मचारियों को बदलने के निर्देश।
शिमला। राजधानी शिमला में सफाई व्यवस्था को लेकर जारी गतिरोध के बीच नगर निगम प्रशासन ने हड़ताल पर गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) लागू होने के बाद भी हड़ताल समाप्त न करने पर बुधवार को सैहब सोसायटी के 41 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। इनमें 34 सुपरवाइजर शामिल हैं।
इसके अलावा निगम प्रशासन ने आउटसोर्स पर कार्यरत 270 कर्मचारियों के स्थान पर नए कर्मचारी उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित कंपनी को निर्देश दिए हैं।
नगर निगम में कार्यरत सफाई कर्मचारी और सुपरवाइजरी स्टाफ मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण सात दिन से शहर के कई इलाकों में घरों से कूड़ा नहीं उठ पाया है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटक भी हो रहे निराश
बाजार, रिहायशी क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर गंदगी बढ़ने से आम जनता में भी नाराजगी देखी जा रही है। शिमला घूमने पहुंच रहे पर्यटकों को शुद्ध वायु की जगह बदबू झेलनी पड़ रही।
एस्मा के बावजूद हड़ताल पर हुई कार्रवाई
स्थिति बिगड़ने के बाद जिला प्रशासन ने नगर निगम क्षेत्र में एस्मा लागू कर दिया था। प्रशासन ने कर्मचारियों को चेतावनी दी थी कि आवश्यक सेवाओं में बाधा डालने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर डटे रहे। अब निगम प्रशासन ने जिला प्रशासन के निर्देशों के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है।
वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। आउटसोर्स कंपनी को नए कर्मचारियों की तैनाती जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि आम लोगों को राहत पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन की कार्रवाई को कठोर बताते हुए इसका विरोध जताया है।
मांगें सुने बिना कार्रवाई करना उचित नहीं : कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को सुने बिना उन पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। हालांकि प्रशासन का रुख फिलहाल सख्त नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गरमा सकता है। कर्मचारी 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी और 4-9-14 के अनुसार वेतन से लेकर सभी तरह की सामाजिक सुरक्षा की मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।
अगर किसी भी मजदूर, सुपरवाइजर, सफाई कर्मी की बर्खास्तगी हुई तो आंदोलन उग्र होगा। राजभवन व सचिवालय मार्च होगा। जेल भरो आंदोलन व गिरफ्तारियां होंगी। रास्ता रोको व चक्काजाम होगा। आंदोलन की दिशा मालरोड की तरफ मोड़ दी जाएगी। अब भी समय है कि नगर निगम तानाशाही छोड़े, दमन तंत्र पर रोक लगाए व 10 प्रतिशत वेतन बहाली करे।
सौजन्य :दैनिक जागरण
नोट: यह समाचार मूल रूप से https://www.jagran.com/himachal-pradesh/shi पर किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









