जंतर-मंतर पर तनाव: नेहा समेत अनशनकारियों को फिर हिरासत में लेने का प्रयास, सीजेपी ने लोगों से पहुंचने की अपील की
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच रविवार को तनाव बढ़ गया. जेएनयू छात्रा नेहा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें समेत अन्य भूख हड़तालियों को तीन बार हिरासत में लेने की कोशिश की. वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन स्थल पर टियर गैस गन लाए जाने का दावा करते हुए समर्थकों से तुरंत जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है|
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच रविवार (19 जुलाई) को तनाव और बढ़ गया. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया कि पुलिस प्रदर्शन स्थल पर टियर गैस गन लेकर पहुंच गई हैं. पार्टी ने लोगों से तुरंत जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की. वहीं, भूख हड़ताल पर बैठी जेएनयू की छात्रा नेहा ने वीडियो संदेश जारी कर बताया है कि दिल्ली पुलिस ने सुबह से तीन बार अनशनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की है, हालांकि प्रदर्शनकारियों ने हर बार इसका विरोध कर उन्हें बचा लिया.
इसी बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च हर हाल में होगा, क्योंकि यह फैसला सोनम वांगचुक का है. उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि प्रदर्शन और संसद मार्च दोनों पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी व्यक्ति हिंसा, अव्यवस्था या भड़काऊ नारेबाजी करेगा, उसे सोनम वांगचुक या सीजेपी का समर्थक नहीं माना जाना चाहिए|
दूसरे दिन भी अनशनकारियों के हिरासत का प्रयास
भूख हड़ताल के 22वें दिन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) की एक्टिविस्ट और जेएनयू की पीएचडी स्कॉलर नेहा ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया है कि रविवार सुबह से दिल्ली पुलिस तीन बार भूख हड़तालियों को हिरासत में लेने की कोशिश कर चुकी है. नेहा के साथ मनीष और आमीन भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
नेहा ने कहा कि हर बार प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और लोग अब भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं. उन्होंने लोगों से जल्द से जल्द प्रदर्शन स्थल पहुंचने की अपील करते हुए कहा, ‘दिल्ली पुलिस शर्म करो, भूख हड़ताल जारी है.’
बता दें कि शनिवार को सोनम वांगचुक को स्टेज से ले जाने के बाद पुलिस ने नेहा, मनीष और आमीन को भी प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें बचा लिया.
अस्पताल में हैं सोनम वांगचुक, पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस बीच, तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर रहे लद्दाख के इनोवेटर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं. उन्हें हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया था.
अब उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी है.
आंग्मो का आरोप है कि उन्हें अब सरकारी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा. उनका कहना है कि अस्पताल ने परिवार को बताया था कि वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर 2.9 तक गिर गया है, जिसे गंभीर और जानलेवा बताया गया. लेकिन अस्पताल की सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में वास्तविक संख्या का उल्लेख नहीं किया गया. उन्होंने दावा किया कि एक स्वतंत्र लैब की जांच में पोटैशियम का स्तर 3.5 आया, जो सामान्य सीमा में है|
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन वांगचुक को छुट्टी नहीं दे रहा और न ही उन्हें परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति दे रहा है.
आंग्मो का कहना है कि अस्पताल की मंजिल पर करीब 30 पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल परिसर में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे परिवार की आवाजाही भी सीमित हो गई है. उन्होंने इसे ‘चिकित्सा नहीं, बल्कि अवैध हिरासत’ बताया और कहा कि यदि वांगचुक को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और सरकार की होगी.
अस्पताल से भी संसद मार्च का संदेश
गीतांजलि आंग्मो ने रविवार को सोनम वांगचुक का एक संदेश भी साझा किया. इसमें वांगचुक ने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को ‘भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ बताया और लोगों से बड़ी संख्या में उसमें शामिल होने की अपील की|
अस्पताल क्या कह रहा है?
सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में कहा गया है कि सोनम वांगचुक होश में हैं और उनकी स्थिति फिलहाल चिकित्सकीय रूप से स्थिर है, लेकिन उनके शरीर में डिहाइड्रेशन के संकेत हैं. अस्पताल के अनुसार, उन्हें बार-बार समझाने के बावजूद वे मुंह से या नस के जरिए तरल पदार्थ लेने से इनकार कर रहे हैं.
कैसे शुरू हुआ यह विवाद?
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनका आंदोलन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, विशेषकर नीट पेपर लीक, के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करता है.
भूख हड़ताल के तीसरे सप्ताह में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. बताया गया कि उनका वजन आठ किलोग्राम से अधिक कम हो गया और ब्लड शुगर का स्तर भी गिरने लगा. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
भारत में भूख हड़ताल की कानूनी स्थिति क्या है?
लाइव लॉ पर प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, भारत में भूख हड़ताल अवैध नहीं है. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़ा एक मान्यता प्राप्त लोकतांत्रिक माध्यम माना जाता है. हालांकि, जब किसी अनशनकारी का जीवन खतरे में पड़ने लगता है, तब अनुच्छेद 19 (विरोध का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के बीच संतुलन बनाने का सवाल सामने आता है.
सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन राज्य की यह भी जिम्मेदारी है कि किसी व्यक्ति के जीवन की रक्षा करे. इसी वजह से अदालतें कई मामलों में अनशनकारी को अस्पताल में भर्ती कर स्वास्थ्य की निगरानी कराने का निर्देश देती रही हैं, हालांकि इसका अर्थ यह नहीं होता कि अदालत उसे अनशन तोड़ने का आदेश दे रही है. ध्यान रहे सोनम वांगचुक के मामले में अदालत ने अस्पताल में भर्ती का आदेश नहीं दिया था, बल्कि स्वास्थ्य की निगरानी करने को कहा था.
भारत में सबसे लंबा भूख हड़ताल आंदोलन इरोम शर्मिला का माना जाता है, जिन्होंने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने की मांग को लेकर लगभग 16 वर्ष तक अनशन किया था|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









