राजस्थान में दलित पुजारी पर हमला, मंदिर से बेदखल करने की साजिश
बराणा का खाखुल देव मंदिर लगभग 400 वर्ष पहले दलित समाज द्वारा स्थापित किया गया था। जब तक मंदिर से आय नहीं थी, किसी को आपत्ति नहीं थी। लेकिन जैसे ही मंदिर में दान आने लगा इस पर मनुवादियों की नजर पर गई|
भीलवड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बराणा गांव में दलित पुजारी विष्णु कुमार बलाई पर हमले की खबर है। बराणा का खाखुल देव मंदिर लगभग 400 वर्ष पहले दलित (बलाई) पुजारी परिवार द्वारा स्थापित किया गया था। आठ पीढ़ियों से यही परिवार इसकी सेवा करता आया है। जब तक मंदिर से आय नहीं थी, किसी को आपत्ति नहीं थी। लेकिन जैसे ही मंदिर की आय से दलित पुजारी परिवार का जीवन बेहतर हुआ, बच्चे अंग्रेज़ी स्कूल में पढ़ने लगे, पक्का मकान बना तो मंदिर पर कब्ज़े की कोशिशें शुरू हो गईं।
फर्जी ट्रस्ट बनाया गया, विवाद खड़ा किया गया और मंदिर को तहसीलदार की रिसीवरी में दे दिया गया। एफआईआर के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को पूजा करने पहुंचे विष्णु कुमार को जातिसूचक गालियां दी गईं। उस पर लाठी-डंडों और लोहे के पाइप से हमला किया गया तथा जान से मारने की कोशिश की गई। पुलिस ने BNS और SC/ST (PoA) Act की धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस घटना की सूचना सामाजिक कार्यकर्ता और दलित आदिवासी एवं घुमंतू अधिकार अभियान (डगर) से जुड़े भंवर मेघवंशी ने इसकी सूचना साझा की है।
इस बीच दलित आदिवासी एवं घुमंतू अधिकार अभियान (डगर) ने मांग की है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग स्वतः संज्ञान लेकर जांच टीम भेजे। मंदिर या तो उसके परंपरागत दलित पुजारी परिवार को सौंपा जाए अथवा न्यायालय के निर्णय तक देवस्थान विभाग के अधीन रखा जाए। लगातार हमलों को देखते हुए विष्णु कुमार को आत्मरक्षा हेतु शस्त्र लाइसेंस भी दिया जाए। डगर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राजस्थान के पुलिस महा निदेशक को पत्र भेजकर मांग की है कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो,पीड़ित परिवार को सुरक्षा, मुआवजा व कानूनी राहत मिले तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो
भंवर मेघवंशी का कहना है कि लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंदिर सरकार की रिसीवरी में है, तब हिंसक भीड़ को कानून हाथ में लेने की छूट किसने दी? प्रशासन दलित पुजारी की सुरक्षा क्यों नहीं कर पाया? क्या कानून केवल कागज़ों में है?
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









