यह कैसी बेजा प्रथा! 2 लाख लेने पर भी नहीं भेजी बेटी, युवती को खेत से घसीटकर ले गए 30 युवक
बड़वानी: राजपुर तहसील क्षेत्र में एक युवती को दिनदहाड़े खेत से जबरन उठाकर ले जाने का मामला सामने आया है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है, जिसने पूरे जिले में कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि युवती के परिजन ने बेजा प्रथा के तहत करीब 2 लाख रुपए लेने के बावजूद उसे ससुराल नहीं भेजा था. इसके बाद करीब 25 से 30 युवक गांव पहुंचे और खेत में काम कर रही युवती को कथित तौर पर घसीटते हुए मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गए|
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना 7 जुलाई की दोपहर राजपुर थाना क्षेत्र के इंद्रपुर गांव में हुई. जारी वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि, कुछ युवक युवती को जबरन पकड़कर मोटरसाइकिल तक ले जा रहे हैं. आसपास मौजूद लोग घटना को देखते रहे, जबकि कुछ लोग वीडियो भी बनाते रहे.
बेजा प्रथा को लेकर बताया जा रहा विवाद
जानकारी के अनुसार, युवती का रिश्ता निहाली गांव निवासी हुकुम रावत से तय हुआ था. आदिवासी समाज में प्रचलित बेजा प्रथा के अनुसार, युवक पक्ष ने युवती के परिजन को करीब 2 लाख रुपए दिए थे. आरोप है कि इसके बावजूद लड़की पक्ष युवती को लड़के के घर नहीं भेज रहा था. इसी विवाद के चलते हुकुम रावत अपने 25 से 30 साथियों के साथ इंद्रपुर गांव पहुंचा और युवती को खेत से जबरन अपने साथ ले गया.
वीडियो में मौजूद कुछ लोगों की बातचीत भी सुनाई दे रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि बेजा हो चुका है, रुपए भी ले लिए हैं, फिर भी लड़की को नहीं भेज रहे थे, इसलिए उसे ले जाया गया. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.
पुलिस ने शुरू की जांच, अभी तक नहीं मिली शिकायत
राजपुर थाना प्रभारी माधव सिंह ठाकुर ने बताया कि, ”मामले में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. इसके बावजूद वीडियो को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम को गांव भेजा गया है. पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और दोनों पक्षों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है.
आदिवासी विकास परिषद ने उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि राहुल सोलंकी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि, ”यदि वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना सही है तो यह कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.” उन्होंने पुलिस प्रशासन से 24 घंटे के भीतर निष्पक्ष जांच कर पूरे मामले की सच्चाई सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न फैले और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके.
क्या है बेजा प्रथा?
निमाड़ अंचल के कुछ आदिवासी समुदायों में बेजा प्रथा लंबे समय से प्रचलित सामाजिक परंपरा मानी जाती है. इसके तहत युवक-युवती की सहमति से विवाह या साथ रहने की प्रक्रिया को समाज की मान्यता दी जाती है. बाद में दोनों परिवारों और समाज के पंचों की मौजूदगी में आपसी समझौते के जरिए रिश्ते को स्वीकार किया जाता है. कई मामलों में आर्थिक लेन-देन या सामाजिक दंड (जुर्माना) भी तय किया जाता है.
हालांकि किसी भी परंपरा या सामाजिक प्रथा के नाम पर किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन ले जाना या बलपूर्वक बंधक बनाना कानूनन अपराध है. यदि जांच में जबरदस्ती या अन्य अपराध साबित होते हैं, तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी. यह स्पष्ट होना बाकी है कि युवती की सहमति थी या नहीं, वायरल वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया और घटना के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं. प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी|
सौजन्य :इटीवी
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