नीट-यूजी: रीटेस्ट से पहले तमिलनाडु में तीन छात्रों ने जान दी, राज्य को परीक्षा से छूट देने की मांग तेज़
तमिलनाडु के सेलम, धर्मपुरी और कृष्णागिरि ज़िलों में 21 जून को आयोजित नीट की पुनर्परीक्षा से पहले तीन छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार की तीखी आलोचना करते हुए नीट को ख़त्म करने या राज्य को इससे छूट देने की मांग की है|
नई दिल्ली: तमिलनाडु में 21 जून को आयोजित नेशनल मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) की पुनर्परीक्षा से पहले चार दिनों में तीन अभ्यर्थियों ने कथित तौर आत्महत्या कर ली. इन घटनाओं के बाद राज्य को नीट से छूट देने की मांग फिर से उठने लगी|
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के शीर्ष अधिकारियों और पुलिस ने इन मौतों की पुष्टि की. ये मौतें सेलम, धर्मपुरी और कृष्णागिरि जिलों में दर्ज की गईं.
पुलिस ने मृत छात्रों की पहचान- एस. गोपिका (19 वर्ष), जो सेलम जिले के एडप्पाडी के पास वेल्लालापुरम की निवासी थीं, आर. रोशिनी (19 वर्ष), जो धर्मपुरी जिले के पालाकोडे के पास एंडापट्टी की रहने वाली थीं, और सी. वेत्री आनंदन (20 वर्ष), जो कृष्णागिरि जिले के होसुर के पास बागलूर रोड क्षेत्र के निवासी थे- के रूप में की है.
पुनर्परीक्षा से पहले तनाव
गोपिका ने 2024 में स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी, और वे दो साल से नीट की तैयारी कर रही थी. रिश्तेदारों ने बताया कि उसके पिता एक सैलून में दिहाड़ी मज़दूर के तौर पर काम करते थे और मां गृहिणी है. उन्होंने कहा कि परिवार कोचिंग क्लास का खर्च नहीं उठा सकता था और गोपिका खुद ही पढ़ाई करते हुए तैयारी कर रही थी. वह 3 मई को हुई परीक्षा समेत तीन बार नीट में शामिल हो चुकी थी और रविवार को हुई पुनर्परीक्षा की तैयारी कर रही थी|
अखबार ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले बताया कि, उसने पहले अपने पिता से कहा था कि परीक्षा की तैयारी में बढ़ती मुश्किलों के कारण वह बहुत तनाव में है और पुनर्परीक्षा की घोषणा ने उसकी चिंता और बढ़ा दी है|
उन्होंने बताया कि शुक्रवार दोपहर, जब उसके माता-पिता काम पर चले गए थे और उसकी बड़ी बहन शहर से बाहर थी, तो आत्महत्या की कोशिश के बाद वह बेहोश पाई गई. उसे एडप्पाडी के एक अस्पताल ले जाया गया और बाद में सलेम सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कोंगनपुरम पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है|
उधर, धर्मपुरी में रोशनी ने 2025 में 12वीं कक्षा पूरी की थी. वह घर लौटने से पहले नमक्कल के एक नीट कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रही थी, ताकि अपनी तैयारी जारी रख सके. 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए उसे धर्मपुरी में परीक्षा केंद्र मिला था|
पुलिस ने बताया कि उसके पिता रामकृष्णन शनिवार शाम घर लौटे तो उन्हें वह मृत मिली. शव को पोस्टमार्टम के लिए धर्मपुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया. पलाकोड पुलिस ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि परीक्षा का दबाव इसकी वजह थी या नहीं|
तीसरी घटना कृष्णगिरि में हुई, जहां के छात्र वेट्री आनंदन ने 2023 में 12वीं कक्षा पूरी की थी और दो साल तक नमक्कल के एक नीट कोचिंग सेंटर में पढ़ाई की थी. पिछली कोशिशों में परीक्षा पास न कर पाने के बाद वह घर से तैयारी कर रहे थे और 3 मई को फिर से परीक्षा में शामिल हुए थे|
अखबार ने पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा कि उन्हें लगा था कि उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन परीक्षा रद्द होने और दोबारा तैयारी करने की नौबत आने के बाद वह निराश हो गए थे|
बताया गया है कि शनिवार दोपहर, जब उनकी मां दुकान पर गई हुई थीं, उन्होंने घर पर आत्महत्या कर ली. हुडको पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए होसुर सरकारी अस्पताल भेजा. पुलिस को एक नोट मिला जिसमें उसने लिखा था कि नीट के डर से वह एक महीने से ठीक से सो नहीं पा रहा था और उसे फिर से फेल होने का डर था. उन्होंने अपने माता-पिता और भाई से माफ़ी मांगते हुए यह भी लिखा कि उनके इस फैसले के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है|
इसी कड़ी में नीलगिरी के कुन्नूर में सलेम के एक निजी कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहीं 18 वर्षीय छात्रा ने रविवार सुबह नीट परीक्षा के लिए निकलने से पहले आत्महत्या की कोशिश की. उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और जहां उनका इलाज चल रहा है|
ज्ञात हो कि नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद एनटीए जांच और आलोचना के घेरे में है. एनटीए द्वारा तीन मई को आयोजित की गई नीट 2026 की परीक्षा पेपर लीक के दावों के बाद रद्द कर दी गई थी. परीक्षा रद्द होने के बाद से देशभर में कम से कम 12 छात्रों की आत्महत्या की खबरें आईं थीं|
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इन मौतों पर तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियों ने तीखी आलोचना की है. डीएमके की छात्र इकाई ने कहा कि वह मंगलवार (23 जून) को विरोध प्रदर्शन करेगा और केंद्र की भाजपा सरकार पर नीट को लेकर लगातार बनी हुई परेशानी के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाएगा|
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने कहा कि इन मौतों से पता चलता है कि या तो पूरे भारत में नीट को खत्म कर दिया जाना चाहिए या कम से कम तमिलनाडु को इससे छूट मिलनी चाहिए|
वहीं, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने तमिलनाडु सरकार से राज्य के लिए छूट हासिल करने के लिए कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया.
बता दें कि तमिलनाडु पहले से नीट के खिलाफ रहा है. तमिलनाडु विधानसभा में 2021 में ‘तमिलनाडु स्नातक चिकित्सा डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश विधेयक, 2021′ पारित किया था, जिसके कानून बनने के बाद राज्य में नीट परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में कक्षा 12 में प्राप्तांक के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा.
हालांकि, इस नीट-विरोधी विधेयक को राष्ट्रपति ने मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद राज्य सरकार ने उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
सौजन्य :द वायर
नोट: यह समाचार मूल रूप से https://thewirehindi.com/331496/three-stu पर किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









