बंगाल: एसआईआर के ख़िलाफ़ मुखर रहे एक्टिविस्ट से जुड़े ठिकानों पर एनआईए का तलाशी अभियान
एनआईए ने गुरुवार सुबह बंगाल में अधिकारों के लिए काम करने वाले तीन कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्ट) और शोधकर्ताओं से जुड़े ठिकानों पर लगभग एक साथ तलाशी अभियान चलाया. ये सभी कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर संगठन बनाने, विस्थापन-विरोधी अभियानों और छात्र आंदोलनों में शामिल रहने के साथ ही एसआईआर के ख़िलाफ़ भी मुखर रहे हैं. नागरिक स्वतंत्रता समूहों ने इस कार्रवाई को डराने-धमकाने की बढ़ती कोशिश बताया है|
कोलकाता: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार (18 जून) की सुबह बंगाल में अधिकारों के लिए काम करने वाले तीन कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्ट) और शोधकर्ताओं (रिसर्चर्स) से जुड़े ठिकानों पर लगभग एक साथ तलाशी अभियान चलाया|
कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह तलाशी अभियान सुबह करीब 4:30 बजे शुरू हुआ. इस कार्रवाई ने नागरिक स्वतंत्रता की पैरवी करने वाले समूहों के बीच चिंता पैदा कर दी है; उनका कहना है कि यह राज्य में जन-आंदोलनों के आयोजकों को डराने-धमकाने की बढ़ती कोशिश है|
ये तीनों कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर संगठन बनाने, विस्थापन-विरोधी अभियानों और छात्र आंदोलनों में शामिल रहे हैं. एनआईए की इस तलाशी का मकसद उन्हें 2022 के रांची के एक मामले से जोड़ना है, जो ‘गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम’ (यूएपीए) और ‘भारतीय दंड संहिता’ (आईपीसी) के तहत दर्ज किया गया था|
उल्लेखनीय है कि यह मामला पूर्वी भारत में माओवादी आंदोलन को फिर से शुरू करने की कथित कोशिशों से जुड़ा हुआ है|
ये तलाशी अभियान कोलकाता और आस-पास के ज़िलों में चलाए गए. इसमें मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाया गया जो राज्य में ‘मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के तहत मतदान के अधिकार छीने जाने का ज़ोरदार विरोध कर रहे थे|
निशाना बनाए गए लोगों में स्कॉलर झेलम रॉय भी शामिल थीं. वह ‘फेमिनिन इन रेजिस्टेंस’ संगठन की एक प्रमुख एक्टिविस्ट हैं और बंगाल चुनावों से पहले एसआईआर प्रक्रिया के तहत मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के ख़िलाफ़ कोलकाता के पार्क सर्कस में हुए धरने की मुख्य आयोजक भी रही थीं|
एनआईए के 12 लोगों की एक टीम दक्षिण कोलकाता के उस अपार्टमेंट में गई जहां रॉय अकेले रहती हैं. लगभग उसी समय लगभग 12 अधिकारियों की एक टीम सर्च वारंट लेकर दक्षिण कोलकाता में तथागत रॉय चौधरी के घर भी पहुंची. 24 वर्षीय रॉय चौधरी ‘रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स फ्रंट’ (आरएसएफ) नामक समूह के महासचिव हैं|
इस संबंध में रॉय चौधरी ने कहा, ‘यह पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने का स्वाभाविक नतीजा है. वे विरोध की आवाज़ को दबाने के लिए अपने पास मौजूद हर तरह के हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम जानते हैं कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को क्या कीमत चुकानी पड़ती है. ऐसे कई कार्यकर्ता जेल में बंद हैं.’
रॉय चौधरी एक रिसर्चर हैं जिन्होंने ‘इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी’ (ईएफएलयू) से अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी की है.
इन दो जगहों के अलावा नादिया के जगुली इलाके में भी केंद्रीय एजेंसी ने सुकुमार कयाल से पूछताछ की. कयाल एक सरकारी स्कूल टीचर हैं और ‘संग्रामी कृषक मंच’ (एसकेएम) के प्रबंधक भी हैं|
यह किसानों से जुड़ा एक संगठन है जो हाल ही में ‘सारा बांग्ला विचाराधीन वोटर मंच’ (विचाराधीन लोगों के लिए पूरे बंगाल का मंच) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ आंदोलनों का नेतृत्व कर रहा था. खबरों के मुताबिक, अधिकारियों ने कयाल को उनके स्कूल में ही रोक लिया और लंबी पूछताछ के लिए उन्हें वहीं रुकने का निर्देश दिया|
किताबें और रसीद बुक ज़ब्त की गईं
झेलम रॉय और रॉय चौधरी ने तलाशी के बारे में एक जैसा ब्योरा दिया. इस दौरान केंद्रीय एजेंसी द्वारा ज़ब्त की गई चीज़ों को देखकर कार्यकर्ताओं ने हैरानी जताई; इन चीज़ों में मुख्य रूप से कानूनी दस्तावेज़ और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध साहित्य शामिल थे|
‘द वायर’ द्वारा देखी गई आधिकारिक ज़ब्ती सूची के अनुसार, रॉय चौधरी के घर से ज़ब्त की गई चीज़ों में बंगाली पत्रिका ‘मानवी एखन’ और ‘स्टूडेंट फोर्स’ की प्रतियां, एसआईआर-एनआरसी मुद्दों से संबंधित स्थानीय पर्चे शामिल थे. विडंबना ये भी रही कि एनआईए ने उस चार्जशीट की कानूनी फोटोकॉपी भी जब्त की, जिसकी जांच एजेंसी खुद कर रही है|
रॉय ने कहा, ‘उन्होंने राजनीतिक कैदियों के समर्थन में फंड इकट्ठा करने के लिए तीन किताबें और एक मनी रसीद बुक ज़ब्त कीं. ये सभी किताबें आसानी से उपलब्ध हैं और उन पर कोई पाबंदी नहीं है. जब मैंने यह बात बताई, तो जांच अधिकारी ने कहा कि वे संदिग्ध लग रही थीं.’
रॉय चौधरी ने कहा कि उनके घर से ज़ब्त किए गए कागज़ात ‘छोटी पत्रिकाएं और लीफलेट थे, जिनमें से किसी पर भी पाबंदी नहीं थी, और उसी मामले से जुड़े अदालती कागज़ात थे जिसके सिलसिले में उन्होंने छापा मारा था.’
रॉय चौधरी ने ज़ोर देकर कहा, ‘वे उस केस से जुड़े कोर्ट के कागज़ात को सबूत के तौर पर ले जा रहे हैं, जिस पर वे काम कर रहे हैं.’
उनके घर पर छापेमारी खत्म होने के बाद रॉय चौधरी को एक आधिकारिक समन नोटिस दिया गया, जिसमें उन्हें आगे की जांच के लिए रांची में पेश होने का निर्देश दिया गया|
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स’ (एपीडीआर) ने केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे डर का माहौल बनाने की कोशिश बताया. एपीडीआर के रंजीत सुर ने इसके दूरगामी नतीजों के बारे में चेतावनी दी|
सुर ने कहा, ‘सरकार पश्चिम बंगाल में जन-आंदोलन के आयोजकों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है. जन-आंदोलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जैसा कि हमने हॉकरों को हटाने, वोटरों के नाम हटाने और विचाराधीन कैदियों को बांधकर घुमाने के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में देखा. लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और सरकार इसी बात से डरी हुई है.’
द वायर ने इन तलाशी अभियानों पर टिप्पणी के लिए एनआईए से संपर्क किया है. अगर एजेंसी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है, तो इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा|
सौजन्य :द वायर
नोट: यह समाचार मूल रूप सेhttps://thewirehindi.com/331131/upsc-prelims- पर किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









