HRC ने दलित व्यक्ति की ‘हिरासत में मौत’ की जांच के आदेश दिए
हैदराबाद: तेलंगाना मानवाधिकार आयोग ने एक दलित व्यक्ति, कार्ला राजेश की अवैध हिरासत, हिरासत में यातना और हिरासत में मौत के आरोपों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं, इन दावों को ‘गंभीर’ बताते हुए पूरी जांच की ज़रूरत बताई है।
जस्टिस न्यूज
आयोग ने यह मामला राजेश की मां, कार्ला ललिता और MRPS नेता मंडा कृष्णा मडिगा द्वारा दायर अलग-अलग शिकायतों के आधार पर उठाया। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि राजेश को चिलकुर और कोडाद ग्रामीण पुलिस ने गैर-कानूनी रूप से हिरासत में लिया, थर्ड डिग्री तरीकों से प्रताड़ित किया, झूठे मामलों में फंसाया गया और हिरासत के दौरान उसके परिवार से मिलने नहीं दिया गया। राजेश मुख्यमंत्री राहत कोष घोटाले में आरोपी था।
आयोग के सामने आरोप लगाया गया कि राजेश को हिरासत में यातना के कारण गंभीर चोटें आईं और बाद में उसे एक सब-जेल से सरकारी अस्पतालों में ले जाया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। TGHRC ने कहा कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो ये मानवाधिकारों और उचित प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन होगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, आयोग ने कहा कि तथ्यों का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए सभी संबंधित शिकायतों की व्यापक जांच ज़रूरी है। इसने गृह विभाग के प्रधान सचिव को घटना पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें राजेश की हिरासत की परिस्थितियां, दिए गए चिकित्सा उपचार और उसकी मौत तक की घटनाओं का क्रम शामिल हो।
पिछले हफ्ते, कोडाद ग्रामीण सर्कल इंस्पेक्टर प्रताप लिंगम को निलंबित कर दिया गया था, जबकि चिलकुर SI सुरेश रेड्डी को राजेश को समय पर इलाज सुनिश्चित करने में कथित लापरवाही के लिए SP कार्यालय से अटैच कर दिया गया था।
राजेश के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि उसे 4 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और हिरासत में थर्ड डिग्री यातना दी गई, जिसके परिणामस्वरूप 16 नवंबर को उसकी मौत हो गई।









