हिमाचल: दलित उत्पीड़न के खिलाफ नाहन में सड़कों पर उतरे संगठन, मुख्यमंत्री को सौंपा 12 सूत्री ज्ञापन
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश में दलित समुदाय पर बढ़ते अत्याचार, भेदभाव और अधिकारों के हनन के खिलाफ सोमवार को नाहन में दलित संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
जस्टिस न्यूज
“दलित शोषण मुक्ति मंच” के बैनर तले एकजुट हुए आठ से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक विरोध रैली निकाली और राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं।
यह विरोध प्रदर्शन नाहन स्थित हिंदू आश्रम से शुरू हुआ और शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए उपायुक्त कार्यालय पर समाप्त हुआ। यहां, मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को 12 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा।
एससी/एसटी एक्ट के तहत लंबित मामलों की जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और सफाई आयोग के गठन समेत 12 सूत्री मांगों को मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
हाल की घटनाओं पर आक्रोश
रैली से पहले, हिंदू आश्रम में विभिन्न दलित संगठनों का एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया गया। आशीष कुमार ने सम्मेलन का उद्घाटन किया, जबकि सतपाल मान ने मंच का संचालन किया।
अपने संबोधन में, आशीष कुमार ने कहा कि हाल के दिनों में राज्य में दलितों पर अत्याचार की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने रोहड़ू में दलित छात्र सिकंदर की संदिग्ध मौत और कुल्लू के सैंज में एक दलित महिला पर हुए जानलेवा हमले और उसकी मौत का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने राज्य भर के दलित समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया है।
आरक्षण और निधि: तेलंगाना की तर्ज पर राज्य में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति विकास निधि अधिनियम बनाया जाए और 85वें संविधान संशोधन को पूरी तरह लागू किया जाए। नई भर्तियों में आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन किया जाए।
पीड़ित सहायता: उत्पीड़न से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
शिक्षा: दलित छात्रों को छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
निगरानी: सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव की जाँच के लिए एक राज्य-स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाए।
बजट: अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग किया जाए और एक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए।
सफाई कर्मचारी: राज्य में सफाई कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए, ठेका प्रणाली को समाप्त किया जाना चाहिए और दिल्ली, पंजाब और कर्नाटक की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी ‘स्वच्छता आयोग’ की स्थापना की जानी चाहिए।
नई समिति का गठन
सम्मेलन के दौरान, भविष्य की रणनीति बनाने और संगठन को मजबूत करने के लिए एक 31 सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया। राजेश तोमर को सर्वसम्मति से संयोजक और विजय चौरिया, प्रसन्न तोमर और प्रवीण सोढ़ा को सह-संयोजक चुना गया।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में दलित समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। मंच की प्रमुख माँगें हैं:
न्याय और कानून: अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज लंबित मामलों की समयबद्ध और निष्पक्ष जाँच की जाए और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।









