Ambedkar Statue Row: Gwalior HC परिसर में धारा 163 लागू, दलित संगठनों की प्रदर्शन की चेतावनी, 260 भड़काऊ पोस्ट हटाई गईं
ग्वालियर हाई कोर्ट बेंच परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा विवाद पर प्रशासन ने धारा 163 (BNS) के तहत निषेधाज्ञा लागू की है. एक वकील के विवादित बयान के बाद भिम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी ने 15 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया है|
ग्वालियर: मध्यप्रदेश के ग्वालियर हाई कोर्ट बेंच परिसर में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) लागू कर दी है.
इस कदम के पीछे वजह है एक वकील द्वारा अंबेडकर के खिलाफ दिए गए कथित विवादास्पद बयान, जिसने दलित संगठनों के बीच भारी आक्रोश फैला दिया है. इसके बाद भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी और अन्य दलित संगठनों ने 15 अक्टूबर को ग्वालियर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है. उधर, कई सवर्ण संगठनों ने भी समानांतर प्रदर्शन की घोषणा कर दी है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.
पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस ने दंगा नियंत्रण की मॉक ड्रिल्स की हैं और निगरानी सिस्टम को और मजबूत किया है. ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान और एसएसपी धर्मवीर सिंह ने व्यापारियों व समुदाय प्रतिनिधियों के साथ शांति समिति की बैठक की. अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी रैली, प्रदर्शन या सभा बिना अनुमति के नहीं की जाएगी. सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.
सोशल मीडिया पर कार्रवाई, 260 पोस्ट हटाई गईं
प्रशासन ने बताया कि अब तक 260 से ज्यादा भड़काऊ पोस्ट हटाई जा चुकी हैं और 50 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किया गया है. पुलिस ने बताया कि दो FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें से एक ग्वालियर और दूसरी महाराष्ट्र में दर्ज है. कथित विवादित बयान देने वाले वकील मिश्रा के खिलाफ भी जांच जारी है.
पुलिस साइबर सेल ने कहा है कि वे लगातार सोशल मीडिया पर नजर रखे हुए हैं, और भी व्यक्ति सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी.
विवाद की जड़ क्या है?
यह विवाद मई 2025 से शुरू हुआ था, जब ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर वकीलों के दो गुट आमने-सामने आ गए थे. टकराव के बाद प्रतिमा की स्थापना रोक दी गई थी. तब से लेकर अब तक इस मुद्दे पर कई बार विरोध-प्रदर्शन और टकराव हो चुके हैं.
स्थिति फिर से भड़कने के बाद, प्रशासन ने प्रतिमा को हाई कोर्ट परिसर से हटाकर 15 किमी दूर एक मूर्तिकार की वर्कशॉप में सुरक्षित रखवाया है. वहां फिलहाल सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की गई है.
सौजन्य :न्यूज़ 18
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