16 साल पहले 14 साल की दलित लड़की की हत्या के जुर्म में मथुरा के एक व्यक्ति को उम्रकैद
आगरा: मथुरा की एक विशेष एससी/एसटी एक्ट अदालत ने मंगलवार को एक 35 वर्षीय व्यक्ति को 2009 में एक 14 वर्षीय दलित लड़की की गला घोंटकर हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लड़की ने यौन उत्पीड़न और जाति-आधारित दुर्व्यवहार का विरोध किया था। अदालत ने कुमार सिंह पर 13,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे अदा न करने पर छह महीने की अतिरिक्त जेल हो सकती है।
जस्टिस न्यूज
लड़की मथुरा के बाहरी इलाके में अपने घर के पास एक झोपड़ी में मृत पाई गई थी और उसके चचेरे भाई की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लड़की ने कहा कि वह एक सार्वजनिक नल से पानी लेने गई थी, तभी 19 वर्षीय सिंह ने उस पर अश्लील टिप्पणियाँ कीं और जातिवादी गालियाँ दीं। जब उसने घटना की सूचना दी, तो उसके परिवार ने आरोपी का विरोध किया, जिसने फिर से जाति-आधारित धमकियाँ दीं।
बाद में दोपहर में, लड़की का शव मिला। आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। तत्कालीन डीएसपी ज्ञानेंद्र सिंह ने जाँच की थी। विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा ने कहा, “लड़की ने सिंह की टिप्पणियों और जातिवादी गालियों पर आपत्ति जताई थी। उसी दिन बाद में, उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कारण की पुष्टि हुई और किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न से इनकार किया गया।”
सिंह ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बाद में मुकदमे के दौरान उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। मार्च 2010 में, पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और कम से कम 10 गवाहों के बयानों के आधार पर आरोप पत्र दायर किया।
मुकदमे के दौरान, सिंह ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि हत्या के समय वह अपने परिवार के साथ अपने धान के खेत में काम कर रहा था। उसने यह भी आरोप लगाया कि लड़की की उसके रिश्तेदारों ने हत्या कर दी थी क्योंकि वह दूसरी जाति के एक लड़के से बात कर रही थी। अदालत ने दोनों दावों को खारिज कर दिया और उसे दोषी ठहराया। उन्होंने इस आधार पर नरमी की मांग की कि यह उनका पहला अपराध था, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।









