बीएचयू ने यूजीसी को भेजा सीट स्थानांतरण का प्रस्ताव:छात्रों ने दलित छात्र शिवम् सोनकर की जीत,UGC से स्वीकृति मिलते ही होगा एडमिशन
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में सीटें भरने को लेकर हुई किरकिरी के बाद बीएचयू ने रुख बदला है। बीएचयू की तरफ से यूजीसी को पीएचडी की बची हुई सीटों को रेट मुक्त श्रेणी से रेट श्रेणी में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। विश्वविद्यालय के स्टूडेंट् इसको शिवम् सोनकर की जीत मान रहे हैं।
UGC से बीएचयू ने मांगी अनुमति
विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार यूजीसी से अनुमति मिलने के बाद दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वही,पीएचडी प्रवेश में गड़बड़ियों को लेकर छात्र बीएचयू प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं तो पिछले 15 दिनों से छात्र शिवम सोनकर कुलपति आवास के बाहर धरने पर बैठा है।
केंद्रीय कार्यालय पर धरना और भूख हड़ताल करने वाले छात्रों के मामले में बीएचयू ने अपनी गलती भी मानी।
बीएचयू में चला हस्ताक्षर अभियान।
749 रिक्त सीटों पर विचार
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से इस मामले में बीएचयू के कार्यवाहक कुलपति, कुलसचिव और अपर परीक्षा नियंत्रक को तलब कर स्पष्टीकरण भी मांगा गया।
बीएचयू ने अब पीएचडी के लिए रिक्त कुल 749 सीटों को रेट मुक्त से रेट श्रेणी में स्थानांतरित करने के लिए यूजीसी को प्रस्ताव भेजा है। यूजीसी से स्वीकृति मिलती है तो दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जाने 16 संकाय में है कितनी सीटे
बीएचयू के 16 संकायों और 140 विषयों में कुल 1540 सीटों पर पीएचडी प्रवेश नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इनमें कुल 791 सीटों पर प्रवेश हुए हैं।
जिनमें 429 अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी, 198 को अन्य पिछड़ा वर्ग, 74 को अनुसूचित जाति, 27 को अनुसूचित जनजाति और 63 को आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के अंतर्गत प्रवेश दिया गया है।
यूजीसी चेयरमैन से मुलाकात कर बताया था पूरा मामला।
जानिए क्या है मामला
शिवम सोनकर का आरोप है कि उन्होंने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में 2024-25 सत्र के लिए आवेदन किया था। उनके विभाग में RET EXEMPTED श्रेणी में 3 सीटें खाली हैं, जबकि RET मोड में केवल 2 सीटें उपलब्ध हैं।
इसके बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिर्फ RET मोड की 2 सीटों पर ही प्रवेश दिया, जबकि RET EXEMPTED की 3 सीटें खाली होने के बावजूद शिवम सोनकर को प्रवेश नहीं दिया गया।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से विधायक ने की थी मुलाकात।
विधायक रागिनी सोनकर बोलीं-ये दलित के साथ अन्याय
विधायक रागिनी सोनकर ने इसे शिक्षा में सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह संविधान में प्रदत्त समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
मामले में गहन जांच और कार्रवाई हो। विधायक की मांग है कि, पीड़ित छात्र को न्याय मिले और उसे पीएचडी प्रवेश दिया जाए, शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ठोस नियम बनाए जाए। देशभर के विश्वविद्यालयों में समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
इस मामले में डॉक्टर रागनी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के चेयरमैन से भी मुलाकात की और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में PHD प्रवेश प्रक्रिया में शिवम सोनकर के लिए न्याय की मांगा है ।
रागिनी शिवम सोनकर के साथ बीएचयू गेट के बाहर प्रदर्शन भी कर चुकी हैं। रागिनी सोनकर ने इस मामले में यूजीसी चेयरमैन और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात की थी।
सौजन्य : दैनिक भास्कर
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