सिपाही की हैवानियत: दलित महिला से रेप, मकान मालकिन बनी सहयोगी, कोर्ट ने खोली पोल!
उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के अकबरपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक पुलिस सिपाही ने दलित महिला के साथ न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि उसे नशीली दवा देकर महीनों तक अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। इस घिनौने कृत्य में मकान मालकिन ने भी उसका साथ दिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सिपाही और मकान मालकिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। यह घटना समाज में व्याप्त अन्याय और पुलिस की लापरवाही को उजागर करती है।
एक ही छत के नीचे शुरू हुई साजिश
अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के जौहरडीह मोहल्ले में किराए के मकान में रहने वाली एक दलित महिला की जिंदगी उस वक्त नर्क बन गई, जब उसी मकान में रहने वाला सिपाही राजेश यादव उस पर गलत नजर डालने लगा। पीड़िता मूल रूप से जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है और पढ़ाई के लिए अकबरपुर में रहती थी। उसने कोर्ट में बताया कि सिपाही राजेश, जो प्रतापगढ़ का निवासी है, मकान मालकिन का करीबी था। उसने मकान मालकिन से पीड़िता का नंबर लिया और अश्लील मैसेज व फोन कॉल्स से उसे परेशान करने लगा।
नशीली दवा से शुरू हुआ दर्दनाक सिलसिला
पीड़िता ने आरोप लगाया कि एक दिन सिपाही राजेश ने उसे खाना ऑफर किया। जब उसने मना किया, तो मकान मालकिन ने दबाव डालकर कहा, “खाना ही तो है, खा लो।” मजबूरी में खाना खाने के बाद वह बेहोश हो गई। होश आने पर उसने खुद को निर्वस्त्र पाया और सिपाही उसके पास मौजूद था। उसने धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो पति को सब बता देगा। इसके बाद महीनों तक उसने महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और उसकी मजबूरी का फायदा उठाया।
पति ने छोड़ा, पुलिस ने भी मुंह फेरा
जब पीड़िता ने सिपाही की हरकतों का विरोध किया, तो उसने सारी बात उसके पति को बता दी। नतीजा यह हुआ कि पति ने उसे छोड़ दिया। सिपाही यहीं नहीं रुका, उसने जातिसूचक गालियां दीं और समझौते के लिए दबाव बनाया। पीड़िता ने थाने से लेकर एसपी तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। हताश होकर उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उसकी फरियाद सुनी गई।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
न्यायालय के सख्त रुख के बाद अकबरपुर कोतवाली में सिपाही राजेश यादव के खिलाफ बलात्कार, धमकी और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। मकान मालकिन पर भी सिपाही की सहायता करने का आरोप लगा और उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ। थाना प्रभारी श्रीनिवास पांडे ने बताया कि कोर्ट के निर्देश पर दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है और जांच जारी है।
समाज में उठे सवाल, कहां है इंसाफ?
यह मामला न सिर्फ पुलिस की संवेदनहीनता को दर्शाता है, बल्कि दलित महिलाओं के प्रति समाज में व्याप्त भेदभाव को भी उजागर करता है। पीड़िता की आपबीती सुनकर लोग गुस्से में हैं और सवाल उठा रहे हैं कि जब पुलिस ही अपराधी बन जाए, तो आम इंसान भरोसा कहां से करे? इस घटना ने अंबेडकरनगर में कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सौजन्य :राईट न्यूज़
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