प्रतापगढ़ में प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करने वाली लड़की की मौत पर हंगामा, ग्रामीणों ने लगाया रेप-हत्या का आरोप
UP News: प्रतापगढ़ के रानीगंज में अस्पताल में काम कर रही युवती की मौत के बाद जमकर बवाल हो गया। परिजनों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया है। इसको लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने भीड़ को तितर वितर करने के लिए लाठी चार्ज किया तो ग्रामीण उग्र हो गए और पत्थर और शुरू कर दिया। पथराव में को रानीगंज समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।
सिद्धार्थ प्रताप सिंह, प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना क्षेत्र में दुर्गागंज बाजार में एक निजी अस्पताल में काम करने वाली दलित युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। मृतका पिछले चार साल से अस्पताल में कार्यरत थी।
अस्पताल से बुलाया, फिर शव घर भेजने की कोशिश
परिजनों को अस्पताल से फोन कर बुलाया गया। लेकिन जब मां हीरावती वहां पहुंचीं, तो कुछ लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। कुछ देर बाद 3 लोग एंबुलेंस से कोमल का शव गांव ले आए और जल्दबाजी में शव छोड़कर भागने लगे। ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और हंगामा शुरू हो गया।
शव पर चोटों के निशान, कपड़े भी फटे मिले
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर अमित पांडेय, कर्मचारी सुनील कुमार, विद्यासागर, शहबाज और दाई गनोर्मा देवी पर साजिश रचकर सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया है। शव की जांच में कई चोटों के निशान पाए गए, जिससे शक गहरा गया।
ग्रामीणों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प, पथराव में कई घायल
मृतका के परिजन और ग्रामीण शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। पुलिस जब शव को कब्जे में लेने पहुंची, तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद पथराव हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी और महिलाएं घायल हो गईं।
सीओ रानीगंज हुए घायल, भारी पुलिस बल तैनात
रानीगंज सीओ विनय प्रभाकर साहनी के सिर पर चोट लगी। बढ़ते तनाव को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। देर रात तक पुलिस शव को कब्जे में नहीं ले पाई।
12 घंटे बाद भी पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
गुरुवार रात लगभग 11 बजे कोमल की संदिग्ध मौत हुई, लेकिन वारदात के 12 घंटे बाद भी पुलिस शव को नहीं ले जा सकी। परिवार और ग्रामीणों की मांग है कि आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।
सौजन्य : नव भारत टाइम्स
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