ये है दलितों की बस्ती, आजादी के 76 साल बाद भी ना सड़क…न पानी, 2km पैदल चलकर ससुराल आती है दुल्हन
पूर्वी चंपारण की एक दलित और अल्पसंख्यक बस्ती आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. यहां शादी करके आई दुल्हन को दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, और बीमारों को कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है. बिजली अपने खर्…और पढ़ें
आदर्श कुमार/पूर्वी चंपारण. आजादी के इतने साल बीत गए, लेकिन पूर्वी चंपारण के बरहरवा सीवन पंचायत में एक दलित और अल्पसंख्यक समाज की बस्ती ऐसी है जहां दुल्हन को गाड़ी से 2 किलोमीटर पहले ही उतरकर पैदल घर तक आना पड़ता है. बीमार व्यक्ति को कंधे पर उठाकर 2 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है ताकि इलाज के लिए आगे का सफर तय हो सके. हर घर जल योजना के नाम पर यहां सिर्फ एक हैंड पंप है और बिजली की व्यवस्था भी खुद के खर्च पर बांस के सहारे की गई है.
यहां दुल्हन पैदल आती है और बीमार कंधे पर जाते हैं. लोकल18 से बातचीत में रासनारायण पासवान ने बताया कि इस रास्ते से आना-जाना बहुत मुश्किल है. शादी-विवाह में तो और भी ज्यादा परेशानी होती है. बेटे की शादी में दुल्हन को 2 किलोमीटर पहले ही गाड़ी से उतारकर पैदल लाना पड़ा. कोई सामान भी लाने पर वहीं उतारना पड़ता है और फिर साइकिल से ढोकर लाते हैं. सुनीता देवी ने बताया कि बहू-बेटी आती हैं तो उन्हें भी उतनी दूर से पैदल लाना पड़ता है. शादी में दूल्हा पैदल जाता है और वापसी में दुल्हन भी पैदल आती है. कोई बीमार पड़ जाए तो उसे कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ता है.
ना बिजली, ना शुद्ध पानी
ज्योतनारायन पासवान ने लोकल18 से बताया कि हम इस हाल में हैं कि कोई देखने तक नहीं आता. चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं, उसके बाद कोई देखने नहीं आता. इस बस्ती में बिजली की भी व्यवस्था नहीं है. अपने पैसे से तार खरीदकर बांस के सहारे बल्ब जलाने की व्यवस्था की है. शुद्ध पानी के नाम पर एक हैंड पंप लगा है. जब उसमें पानी नहीं आता तो 3-4 किलोमीटर दूर जाकर पानी भरकर लाना पड़ता है.
साभार : हिंदी.न्यूज़18
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