कैमूर में दबंगों का कहर, श्मशान का किया अतिक्रमण, दलितों को अंतिम संस्कार करने से रोका
Kaimur News: कैमूर के पट्टी गांव में श्मशान भूमि से मिट्टी निकाल कर बेचने का मामला सामने आया है। दलितों का आरोप है कि जमीन पर कब्जा कर वहां गेहूं की बुवाई कराई गई है। पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए दलितों ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।
कैमूर: जिले के पट्टी गांव में श्मशान की ज़मीन पर कब्ज़े और उत्पीड़न का मामला सामने आया है। बिंदा मुसहर समेत कई दलित परिवारों ने डीएम सावन कुमार से न्याय की गुहार लगाई है। आरोप है कि हरिनारायण तिवारी नामक व्यक्ति ने श्मशान भूमि पर कब्ज़ा कर मिट्टी बेच दी और खेती शुरू कर दी। यहां तक कि खुदाई के दौरान निकले शवों को दूसरी जगह दफ़नाने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
झूठा मुकदमा दर्ज
दलित परिवारों का यह भी आरोप है कि कुदरा थाना प्रभारी की मिलीभगत से उन पर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है। पट्टी गांव के निवासी बिंदा मुसहर ने बताया कि गांव में 137 डिसमिल ज़मीन श्मशान के लिए है। यहां वर्षों से लोग अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। 24 जनवरी 2025 को बिंदा मुसहर की पत्नी लखनिया देवी का निधन हुआ, जिन्हें इसी श्मशान भूमि में दफ़नाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हरिनारायण तिवारी ने इस ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है। वह मिट्टी खोदकर बेच रहा है और गेहूं की खेती भी कर रहा है।
बिंदा मुसहर का आरोप
बिंदा मुसहर ने आगे बताया कि ज़मीन की नापी के लिए 25 जनवरी 2025 को जनता दरबार में अंचलाधिकारी ने आदेश दिया था। इसके बावजूद कुदरा थाना प्रभारी ने शिव बच्चन मुसहर, ललन मुसहर, राम आशीष मुसहर और बिंदा मुसहर पर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरिनारायण तिवारी और पुलिस अवर निरीक्षक राज कुमार मिश्रा मिलकर खुदाई में निकले शवों को कहीं और दफ़नाने का दबाव बना रहे हैं। उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी भी दी जा रही है।
जमीन पर कब्जा
बिंदा ने कहा है कि पट्टी गांव में 137 डिसमिल सर्व साधारण श्मशान भूमि है जहां पर हमेशा से ही लोग शव फूंकते थे और गाड़ते थे, इसी दौरान मेरी पत्नी लखनिया देवी का 24-1-2025 को देहांत हो गया जिसके बाद उसके शव को श्मशान वाले भूमि में दफना दिया गया, वहीं गांव के ही हरि नारायण तिवारी द्वारा उस जमीन पर कब्जा कर लिया गया है, और वहां से मिट्टी की खुदाई कराकर बेचा जा रहा है, और गेहूं की बुवाई भी कराई गई है।
जिलाधिकारी से लगाई गुहार
इस अन्याय के खिलाफ मुसहर समुदाय के लोग डीएम के पास पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच, ज़मीन की नापी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान कई महिलाएं और ग्रामीण भी मौजूद थे। यह मामला सामाजिक भेदभाव और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाएगा? क्या दोषियों को सज़ा मिलेगी? यह सवाल अभी भी बने हुए हैं।
सौजन्य: नवभारत टाइम्स
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