बंगाल में एक के बाद एक कई आधार कार्ड निष्क्रिय, बांग्लादेशी दलितों पर सबसे ज्यादा असर; CAA-NRC की आहट
राज्य की विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक असीम सरकार ने कहा है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के कम से कम छह जिलों में हजारों आधार कार्डों को निष्क्रिय करने से ज्यादातर बांग्लादेश के हिंदू दलित प्रभावित हुए हैं। विधायक ने सोमवार को एचटी को बताया कि ये दलित 2014 के बाद पासपोर्ट के साथ भारत में आए थे, लेकिन वीजा समाप्त होने के बाद वापस नहीं गए। इसके अलावा, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक राज्यसभा सदस्य ने भी कहा कि ये बांग्लादेशी नागरिक लंबे समय से बंगाल में रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि वे किस साल से यहां रह रहे हैं। यह पहली बार है कि राज्य के प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं ने आधार कार्ड धारकों की पहचान पर बात की है। राज्य में इसी महीने आधार कार्ड को निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) करने की कवायद शुरू हुई थी।
टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भाजपा बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करना चाहती है और आधार कार्ड को निष्क्रिय करना उसी का पहला चरण है। 2019 में संसद द्वारा पारित, सीएए उन गैर-मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करता है जो धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए 2015 से पहले अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत में आए थे। टीएमसी का कहना है कि सीएए असंवैधानिक है क्योंकि यह एक धर्मनिरपेक्ष देश में नागरिकता को धर्म से जोड़ता है।
2014 के बाद बांग्लादेशी पासपोर्ट के साथ भारत में प्रवेश किया
बांग्लादेश से भारत में शरण लेने वाले असीम सरकार ने 2021 में भाजपा के लिए नादिया जिले की हरिनघाटा विधानसभा सीट जीती थी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड निष्क्रिय करने की प्रक्रिया ने साबित कर दिया है कि लोगों के लिए आने वाले चुनावों में भाजपा का समर्थन करना कितना महत्वपूर्ण है ताकि सीएए लागू हो सके। उन्होंने कहा, “लगभग एक हजार प्रभावित लोगों ने मुझे पत्र लिखा। मैंने उनके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का अध्ययन किया। उनमें से अधिकांश ने 2014 के बाद बांग्लादेशी पासपोर्ट के साथ भारत में प्रवेश किया।” असीम सरकार ने ममता बनर्जी से उस तर्क का भी खंडन किया जिसमें वह कहती हैं कि जो शरणार्थी यहां बस गए हैं और वोट डाल चुके हैं, उन्हें सीएए के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।
आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने लोगों को पत्र लिखकर सूचित किया कि उनका आधार कार्ड डीएक्टिवेट किया जा रहा है। एचटी द्वारा देखे गए एक पत्र में यूआईडीएआई ने लिखा, ‘आपको यह सूचित किया जाता है कि आपको जारी किया गया आधार नंबर xxxx xxxx 2019 आधार के विनियमन 28A के प्रावधानों के तहत डीएक्टिवेट कर दिया गया है। यह इसलिए किया गया है कि आप भारत में रहने की आवश्यकताएं पूरी नहीं करते हैं।” यूआईडीएआई द्वारा आधार कार्ड की जांच की टाइमिंग महत्वपूर्ण है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 फरवरी को घोषणा की थी कि लोकसभा चुनाव से पहले सीएए को लागू किया जाएगा। हालांकि केंद्र और बीजेपी ने एनआरसी पर चुप्पी साध रखी है।
दलित और नामशूद्र समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित
असीम सरकार ने कहा कि यूआईडीएआई की तरफ से इन पत्रों को प्राप्त करने वालों में से अधिकांश दलित और नामशूद्र समुदायों के सदस्य हैं। कई प्रभावित लोगों ने इसकी पुष्टि की लेकिन कोई भी यह बताने को तैयार नहीं था कि वे किस वर्ष भारत आए थे। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग कह रहे थे कि वे “15 से 20 साल पहले” और “20 से 30 साल पहले” भारत आए थे। पश्चिम बर्दवान जिले के जमालपुर की एक कॉलेज छात्रा आशा विश्वास ने कहा, “मैं 19 साल की हूं। जब मैं बच्ची थी तो मेरे माता-पिता बांग्लादेश से आए थे। मुझे साल याद नहीं आ रहा।”
यूआईडीएआई अधिकारियों ने 19 फरवरी को एक बयान में कहा था कि आधार कार्ड धारकों को आधार डेटाबेस को अपडेट रखने के लिए समय-समय पर सूचनाएं जारी की जा रही हैं लेकिन किसी भी नंबर को रद्द नहीं किया गया है। इसने ये भी कहा था कि आधार कार्डों को दोबारा एक्टिवेट करने की प्रक्रिया 20 फरवरी के आसपास शुरू होगी। इस पर असीम सरकार ने कहा, “दोबारा आधार कार्ड को एक्टिवेट करना केंद्र सरकार की दया को दर्शाता है। लेकिन आधार, पैन और राशन कार्ड हासिल करने के बावजूद कोई यहां नहीं रह सकता। मैंने पाया कि इनमें से कई लोग 2014 से पहले भी कई बार पासपोर्ट के साथ भारत में आए थे। कुछ लोगों ने अपने बच्चों को स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला भी दिलाया, लेकिन कानून की नजर में वे भारतीय नागरिक नहीं हैं।”
‘सरकार के पास इन लोगों का डेटा है’
उन्होंने कहा, “हमारे इमिग्रेशन डिपार्टमेंट और बांग्लादेश सरकार के पास इन लोगों का डेटा है। यह मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ ऐसे लोगों को भी पत्र भेजे गए थे जो 2014 से पहले अवैध रूप से भारत में आए थे लेकिन उन्हें हाल ही में आधार कार्ड मिले हैं।” 2016 में जब अधिनियम पारित किया गया था तब कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक सुनवाई के दौरान बंगाल सरकार द्वारा कहा गया था कि आधार को नागरिकता दस्तावेज के रूप में नहीं माना जा सकता है। राज्य सरकार के इस तर्क को बरकरार रखते हुए, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि आधार अधिनियम की धारा 9 के अनुसार, कार्ड स्वयं नागरिकता के प्रमाण का कोई अधिकार प्रदान नहीं करता है।
नामशूद्र समुदाय की ओर ध्यान केंद्रित
चल रहे आधार विवाद ने नामशूद्र समुदाय की ओर ध्यान केंद्रित कर दिया है। इस समुदाय ने 1947 में विभाजन और 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद भारत की ओर पलायन करना शुरू कर दिया था। राज्य के रिकॉर्ड के अनुसार, बंगाल में इस समुदाय के लगभग एक करोड़ लोग हैं। 2011 की जनगणना के दौरान, बंगाल की जनसंख्या 9.13 करोड़ थी। नामशूद्र आबादी के एक हिस्से में मतुआ समुदाय शामिल है जिसने 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का समर्थन किया था। बीजेपी ने रिकॉर्ड बनाते हुए बंगाल की 42 में से 18 सीटें छीन लीं और अब 35 का लक्ष्य रखा है। मतुआ उत्तर 24 परगना जिले के बोंगांव लोकसभा क्षेत्र के ठाकुरनगर में स्थित अपने सर्वोच्च निकाय, अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की बात मानते हैं।
चल रहे आधार विवाद ने नामशूद्र समुदाय की ओर ध्यान केंद्रित कर दिया है। इस समुदाय ने 1947 में विभाजन और 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद भारत की ओर पलायन करना शुरू कर दिया था। राज्य के रिकॉर्ड के अनुसार, बंगाल में इस समुदाय के लगभग एक करोड़ लोग हैं। 2011 की जनगणना के दौरान, बंगाल की जनसंख्या 9.13 करोड़ थी। नामशूद्र आबादी के एक हिस्से में मतुआ समुदाय शामिल है जिसने 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का समर्थन किया था। बीजेपी ने रिकॉर्ड बनाते हुए बंगाल की 42 में से 18 सीटें छीन लीं और अब 35 का लक्ष्य रखा है। मतुआ उत्तर 24 परगना जिले के बोंगांव लोकसभा क्षेत्र के ठाकुरनगर में स्थित अपने सर्वोच्च निकाय, अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की बात मानते हैं।
इस महासंघ ने 2019 में ठाकुरनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मेजबानी की थी। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए, संप्रदाय के युवा चेहरे, शांतनु ठाकुर ने अपनी चाची और तत्कालीन मौजूदा सांसद, टीएमसी की ममता बाला ठाकुर को बोनगांव सीट पर हराया था। महासंघ के अध्यक्ष और केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने आधार डिएक्टिवेशन को तकनीकी त्रुटि बताया है और अपने लोगों की मदद करने का वादा किया है।
सौजन्य : Live hindustan
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