बांदा में सामूहिक दुष्कर्म के बाद दलित महिला की हत्या, हत्यारोपियों में भाजपा नगर अध्यक्ष भी शामिल
प्रभावशाली जाति के दबंगों ने परिवार की दलित महिला को काम देने के बहाने फोन करके दोपहर में घर से बुलाया और अपनी आटाचक्की में गैंगरेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी। यही नहीं, शव के भी टुकड़े कर दिए और फरार हो गए। महिला की लाश परिजनों को आटाचक्की पर मिली|
उत्तर प्रदेश के बांदा में 31 अक्टूबर को एक जघन्य वारदात सामने आयी थी। यहां घर में घुसकर एक दलित महिला से पहले सामूहिक दुष्कर्म किया गया और उसके बाद सिर और हाथ काटकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। इतना ही नहीं आरोपियों ने उसका महिला की लाश निर्वस्त्र अवस्था में चक्की घर के अंदर फेंक दिया। बेटी अपनी मां की चीखों की आवाज सुनकर दरवाजा खटखटाती रही, मगर उसकी चीखें कमरे में ही कैद हो गयीं। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक दलित महिला के साथ जघन्य वारदात को अंजाम देने वालों में भाजपा का नगर अध्यक्ष भी शामिल था। महिला के पति ने अपनी शिकायत में चक्की संचालक, उसके भाई बउआ और उनके पारिवारिक महुआ के भाजपा मंडल अध्यक्ष रामकृष्ण शुक्ला के खिलाफ दुष्कर्म करने के बाद गर्दन व हाथ काटकर हत्या करने का आरोप लगाया है।
इस घटना का विरोध करते हुए भाकपा (माले) ने कहा है कि योगी सरकार में कमजोर वर्गों पर जुल्म बेइंतहा बढ़ गए हैं और दबंग व अपराधी बेखौफ होकर घृणित अपराध कर रहे हैं। पार्टी ने बांदा में दलित महिला की गैंगरेप व नृशंस हत्या के दोषियों को फौरन गिरफ्तार करने और कड़ी सजा देने की मांग की है। माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि योगी सरकार में दलित और महिला सबसे कमजोर शिकार (सॉफ्ट टारगेट) बन गए हैं। उनके मान-सम्मान, सुरक्षा व जान की कोई अहमियत नहीं है। भाजपा को उनकी याद तब आती है, जब वोट लेने होते हैं। बाकी समय उनके साथ घोर अमानवीय व्यवहार होता है। उन्होंने कहा कि बांदा के एक पीड़ित दलित परिवार के परिजनों के अनुसार, प्रभावशाली जाति के दबंगों ने परिवार की दलित महिला को काम देने के बहाने फोन करके दोपहर में घर से बुलाया और अपनी आटाचक्की में गैंगरेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी। यही नहीं, शव के भी टुकड़े कर दिए और फरार हो गए। महिला की लाश परिजनों को आटाचक्की पर मिली। घटना जिले के गिरवां थाने के पतौरा गांव की है।
माले नेता ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति यह है कि जाने माने विश्वविद्यालय के कैम्पस भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गए हैं। बीएचयू में अपने मित्र के साथ जा रही एक छात्रा के साथ परिसर में अपराधियों द्वारा जबरदस्ती करने और कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाने जैसी घटना सामने आई है, जिसके खिलाफ छात्र-छात्राएं आंदोलित हैं। सरकार की कथनी में कानून व्यवस्था चंगा है, मगर धरातल पर न दलितों की जान सुरक्षित है, न महिलाओं की इज्जत|
सौजन्य :जनज्वार
दिनांक :03 नवम्बर 23
नोट : समाचार मूल रूप से janjwar.com में प्रकाशित हुआ है नवाधिकारों के प्रति सवेदनशीलता व जागरूकता के उद्देश्य से
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