आज का दिन इसलिए बाबा अंबेडकर ने लाखों दलितों के साथ अपनाया था बौद्ध धर्म!
आज का दिन इतिहास के पन्नों में इसलिए खास है क्योंकि आज ही के दिन संविधान निर्माता बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर ने अपने लाखों साथियों के साथ हिन्दू धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया था|
आज का दिन इतिहास के पन्नों में इसलिए खास है, क्योंकि आज ही के दिन संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने अपने 3,80,000 साथियों के साथ हिन्दू धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया था. 1950 के दशक में ही बाबा साहेब बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित हुए और बौद्ध सम्मेलन में भाग लेने श्रीलंका (तब सीलोन) गए. 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में उन्होंने अपने लाखों समर्थकों केसाथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया|
इस मौके पर उन्होंने जो 22 प्रतिज्ञाएं लीं उससे हिंदू धर्म और उसकी पूजा पद्धति को उन्होंने पूर्ण रूप से त्याग दिया. डॉक्टर अंबेडकर के साथ लाखों दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया और ये पूरी दुनिया में धर्म परिवर्तन की सबसे बड़ी घटना थी. हालांकि खुद उन्होंने इसे धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि धर्म-जनित शारीरिक, मानसिक व आर्थिक दासता से मुक्ति बताया|
अंबेडकर का जन्म हिन्दू जाति में अछूत और निचली मानी जाने वाली महार जाति में हुआ था. उन्होंने हिन्दू धर्म में व्याप्त छूत प्रथा को खत्म करने के लिए न सिर्फ सामाजिक बल्कि कानूनी रास्ता भी अख्तियार किया. वे मानते थे कि कानून में बदलाव लाकर ही दिल और दिमाग में बदलाव संभव है. उनके बौद्ध धर्म अपनाने के पीछे बौद्ध धर्म में छुआछूत और जाति प्रथा जैसी कुरीति का न होना था|
हिंदू पैदा तो हुआ हूं, लेकिन हिंदू मरूंगा नहीं अंबेडकर जिस ताकत के साथ दलितों को उनका हक दिलाने के लिए उन्हें एकजुट करने और राजनीतिक-सामाजिक रूप से उन्हें सशक्त बनाने में जुटे थे, उतनी ही ताकत के साथ उनके विरोधी भी उन्हें रोकने के लिए जोर लगा रहे थे. लंबे संघर्ष के बाद जब अंबेडकर को भरोसा हो गया कि वे हिंदू धर्म से जातिप्रथा और छुआ-छूत की कुरीतियां दूर नहीं कर पा रहे तो उन्होंने वो ऐतिहासिक वक्तव्य दिया जिसमें उन्होंने कहा कि मैं हिंदू पैदा तो हुआ हूं, लेकिन हिंदू मरूंगा नहीं|
हिंदू कोड बिल पर विरोध
आजादी के बाद पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में डॉक्टर अंबेडकर कानून मंत्री बने और नेहरू की पहल पर उन्होंने हिंदू कोड बिल तैयार किया लेकिन इस बिल को लेकर भी उन्हें जबर्दस्त विरोध झेलना पड़ा. खुद नेहरू भी तब अपनी पार्टी के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर बढ़ते दबाव के सामने झुकते नजर आए. इस मुद्दे पर मतभेद इस कदर बढ़े कि अंबेडकर ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि बाद में हिंदू कोड बिल पास हुआ और उससे हिंदू महिलाओं की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव भी आया लेकिन अंबेडकर के बिल से ये कई मामलों में लचीला था|
बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं:-
1 मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा|
2 मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा|
3 मैं गौरी, गणपति जैसे हिंदू धर्म के किसी देवी देवता को नहीं मानूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा|
4 ईश्वर ने कभी अवतार लिया है, इस पर मेरा विश्वास नहीं|
5 मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि तथागत बौद्ध विष्णु के अवतार हैं| ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूं|
6 मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और न ही पिंडदान करवाऊंगा|
7 मैं बौध धम्म के विरुद्ध कभी कोई आचरण नहीं करूंगा|
8 मैं कोई भी क्रिया-कर्म ब्राह्मणों के हाथों से नहीं करवाऊंगा|
9 मैं इस सिद्धांत को मानूंगा कि सभी इंसान एक समान हैं|
10 मैं समानता की स्थापना का यत्न करूंगा|
11 मैं बुद्ध के आष्टांग मार्ग का पूरी तरह पालन करूंगा|
12 मैं बुद्ध के द्वारा बताई हुई दस परिमिताओं का पूरा पालन करूंगा|
13 मैं प्राणी मात्र पर दया रखूंगा और उनका लालन-पालन करूंगा|
14 मैं चोरी नहीं करूंगा|
15 मैं झूठ नहीं बोलूंगा|
16 मैं व्याभिचार नहीं करूंगा|
17 मैं शराब नहीं पीऊंगा|
18 मैं अपने जीवन को बुद्ध धम्म के तीन तत्वों-अथार्त प्रज्ञा, शील और करुणा पर ढालने का यत्न करूंगा|
19 मैं मानव मात्र के विकास के लिए हानिकारक और मनुष्य मात्र को उच्च–नीच मानने वाले अपने पुराने हिंदू धर्म को पूर्णत: त्यागता हूं और बुद्ध धम्म को को स्वीकार करता हूं|
20 यह मेरा पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध का धम्म ही सही धम्म है|
21 मैं यह मानता हूं कि अब मेरा नया जन्म हो गया है|
22 मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि आज से मैं बुद्ध धम्म के अनुसार आचरण करूंगा|
सौजन्य : आज तक
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