बांदा में दलित को अपमानित कर मारने-पीटने के दोषियों को सजा
उधारी न चुकाने पर दलित को अपमानित कर मारने-पीटने के तीन दोषियों को विशेष न्यायाधीश एससीएसटी अनु सक्सेना की अदालत से चार-चार साल कारावास और प्रत्येक को 7200 रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई। अर्थदण्ड अदा न करने पर 15-15 दिन अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। तीनों का सजायावी वारंट बनाकर पुलिस अभिरक्षा में जेल भेजा गया।
विशेष लोक अभियोजक विमल सिंह व डॉ. महेन्द्र द्विवेदी ने बताया कि बबेरू थाना के साथी गांव निवासी शिवनंदन ने बबेरू थाने में 26 जून 2001 को तहरीर दी। बताया कि करीब एक बजे दिन में वह अपने बेटे बच्छराज के साथ दरवाजे पर बैठा था। गांव के राम प्रताप, कुन्ना व सन्तोष पुत्र चन्द्रशेखर कुर्मी व राजाभइया उर्फ सरदार अपने हाथों मे लाठी-डंडा व तमंचा लेकर आए। गाली देते हुए बोले कि हमारा पैसा आज दे दो।
कुछ दिन में देने की बात कही तो एकराय होकर मारने-पीटने लगे। बेटे बच्छराज व बेटी बेलपतियां व गीता को भी लात घूसों से मारपीटा और अपमानित किया। जान बचाने के लिए परिवार सहित घर में घुसा तो दो लोग दरवाजा फाड़कर घर के अंदर घुस गए और पूरे परिवार को मारापीटा। मामले का आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया गया। घटना के समय कुन्ना नाबालिग था। इसलिए उसकी पत्रावली छह अप्रैल 2014 को अलग करके जुबलाइन कोर्ट भेज दी गई। तीनों के खिलाफ आरोप सात फरवरी 2005 को बनाया गया। मामले मे सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य व अघिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपने 18 पृष्ठीय फैसले में राम प्रताप, संतोष व राजाभइया को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
सौजन्य : Live hindustan
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