दलित-आदिवासी वोट बैंक पर सियासत, कांग्रेस निकालेगी संविधान-आरक्षण बचाओ यात्रा
भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 से पहले बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टी एसटी और एससी वर्ग को साधने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं. एक तरफ बीजेपी अपनी योजनाओं के नाम पर जनता के बीच पहुंच समर्थन जुटाने में व्यस्त है. कांग्रेस का आरोप है प्रदेश में दलित और आदिवासियों के खिलाफ लगातार अत्याचार बढ़े हैं. इसके विरोध में वो संविधान और आरक्षण बचाओ यात्रा निकालकर सरकार की पोल खोलेगी.
मध्यप्रदेश में किसी भी दल को 70 सीट पर पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एसटी और एससी वर्ग (SC-ST) की होती है. प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में एससी वर्ग के लिए 35 तो वहीं आदिवासी वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं. इसके साथ ही 84 विधानसभा सीटों पर आदिवासी वोट बैंक का अच्छा खासा दखल है. कांग्रेस का आरोप है प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार है और इस दौरान दलित और आदिवासियों के खिलाफ जमकर अत्याचार हुए हैं. हाल ही की बात करें तो दमोह और भिंड के उदाहरण हमारे सामने हैं, दलित समाज का लगातार उत्पीड़न हो रहा है. इसलिए अब कांग्रेस का एससी विभाग पूरे प्रदेश में संविधान और आरक्षण बचाओ यात्रा पीसीसी चीफ कमलनाथ के नेतृत्व में निकालेगा. इस दौरान सरकार की नाकामियों की पोल जनता के बीच खोली जाएगी साथ ही कांग्रेस के साथ इस वर्ग को जोड़ने का प्रयास होगा.
बीजेपी का आरोप संविधान बचाओ यात्रा नहीं कांग्रेस बचाओ यात्रा निकाली जाएगी
आरक्षण और संविधान पर गरमाई सियासत को लेकर सत्ता पक्ष बीजेपी का कहना है संविधान के मूल्यों की रक्षा करने का काम हमेशा से बीजेपी ने किया है. बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा पीएम मोदी की अगुवाई में 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की शुरुआत हुई. विपक्ष संविधान बचाओ नहीं बल्कि कांग्रेस बचाओ यात्रा निकाल रही है.
पिछले चुनाव में कांग्रेस को मिला था इस वर्ग का साथ
मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव में दलित और आदिवासी वर्ग का समर्थन कांग्रेस को मिला था. यही वजह थी कि कांग्रेस ने 230 में से 114 सीटों पर जीत हासिल की थी. भाजपा को सिर्फ 109 सीटें मिली थीं. कांग्रेस की लंबे समय बाद 2018 में सत्ता में वापसी जरूर हुई थी लेकिन सिंधिया के दल बदलने से बड़ा सियासी उलटफेर हुआ. ज्यादा दिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं रही. एक बार फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी. अब फिर से कांग्रेस की कोशिश है कि दलित और आदिवासी वर्ग का समर्थन पार्टी को मिले और फिर मजबूती के साथ प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी हो सके. लेकिन भाजपा भी इस वर्ग को साधने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ रही है.
सौजन्य : News18
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