सेंट्रल ऑफिस का घेराव कर कहा- गरीब, दलित और आदिवासी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित होंगे
फीस वृद्धि के विरोध में अब काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बहुजन इकाई की भी एंट्री हो गई है। आज बहुजन इकाई से जुड़े शोधार्थी और यूजी-पीजी के छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस का घेराव किया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किये गए इस फीस वृद्धि से गरीब, दलित, आदिवासियों, पिछड़े और वंचित वर्ग से आने वाले छात्र-छात्राओं पर सीधा असर पड़ेगा।
फीस बढ़ाकर शिक्षा का बाजारीकरण न किया जाए। छात्रों ने मांग रखी कि गुणवत्ता में वृद्धि करने की बात कहकर विश्वविद्यालय हमारी फीस न बढ़ाए। छात्रों ने कहा कि उनकी अभी कोई आय नहीं है जो बढ़ी हुई फीस वहन कर सके। कोर्सेज और हॉस्टलों की फीस में 400% से लेकर 500% तक वृद्धि कर दी गई है।
इससे पहले ABVP छात्र संगठन दो दिन से धरने पर बैठा है। वहीं, NSUI, भगत सिंह छात्र मोर्चा, CYSS और अब बहुजन इकाई भी इस मुद्दे पर बाकी संगठनों के साथ आती दिख रही है।
सरकार नहीं कर पा रही अपने कर्तव्यों का निर्वहन
बहुजन इकाई के करीब 10-15 छात्रों ने विरोध स्वरूप कहा’ ”हम अच्छे से जानते हैं कि मूल संविधान के भाग IV के अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 39(F) में सरकार द्वारा वित्तपोषित सम्मान और सुलभ शिक्षा का प्रावधान किया गया है। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि सरकार अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर पा रही है। हमारा कुलपति महोदय से निवेदन है कि छात्रहितों को ध्यान में रखते हुए फीस वृद्धि वापस लिजिए। ताकि देश के गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े और वंचित समुदाय के साथ अन्याय न हो।”
आज अनिश्चितकालीन धरने का तीसरा दिन
ABVP-BHU इकाई के सदस्य आज तीसरे दिन अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। यहां से कुछ छात्र मुंह पर काली पट्टी बांधकर वीसी आवास भी पहुंचे हैं। छात्र अधिष्ठाता कार्यालय की पार्किंग को प्रोटेस्ट हाउस में तब्दील कर छात्र विरोध जता रहे हैं। आज दोपहर में चीफ प्रॉक्टर भी पहुंचे, मगर छात्राें ने कहा कि फीस वृद्धि वापसी के बिना नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि अगले सत्र से आने वाले छात्रों की फीस बढ़ाने की घोषणा विश्वविद्यालय प्रशासन वापस ले।
फीस महंगी हो गई तो फिर BHU में पढ़ाई का क्या अर्थ रहेगा। वहीं, पुराने छात्रों की हॉस्टल फीस न बढ़ाई जाए। इसे विश्वविद्यालय तुरंत वापस कर ले। नहीं करेंगे तो हम DSW में अनवरत विरोध करते रहेंगे।
सौजन्य : Dainik bhaskar
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