बसपा पर है यहां की जनता को विश्वास, अन्य पार्टियों के लिए यहां मुश्किलें
अकबरपुर. प्रदेश के अम्बेडकर नगर के अंतर्गत आने वाली हर सीट पर मायावती की पकड़ मजबूत है. अकबरपुर भी दलित बाहुल क्षेत्र है और यहां पर भी बहुजन समाज पार्टी को ही लोगों का ज्यादा सपोर्ट मिलता है. दलित बाहुल इस क्षेत्र से 1998, 1999 और 2004 में मायावती सांसद रहीं. इसके अलावा 2009 और 2019 में भी यहां के लोगों ने बसपा के प्रत्याशियों पर ही विश्वास जताया.
इतिहास पर नजर डालें तो सबसे पहले इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी का खाता 1993 में खुला. पार्टी के उम्मीदवार राम अचल राजभर ने यहां पर सबसे पहले जीत दर्ज की. इसके बाद फिर से राम अचल पर लोगों ने भरोसा दिखाया और 1996 में भी उन्हें ही विधायक बनाया. 2002 में भी बसपा को ही लोगों ने अपना मत दिया और एक बार फिर राम अचल को विययी सीट पर बैठाया. राम अचल की जीत का सिलसिला यहीं नहीं थमा. राम अचल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से 2007 के चुनावों में भी जनता को अपनी ओर खींचा. अचल इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के राममूर्ति वर्मा को शिकस्त दी. लेकिन राममूर्ति वर्मा ने उम्मीद नहीं छोड़ी और फिर से 2012 में समाजवादी पार्टी के ही टिकट से चुनाव लड़ा. इस बार जनता ने उनके पक्ष में मतदान किया और उन्हें यहां से विधायक बनाया.
2017 चुनावों की बात करें तो भाजपा को मोदी लहर के कारण यहां से उम्मीदें थीं. लेकिन यहां पर राजनीतिक गणित कुछ अलग ही था. राम अचल ने यहां पर एक बार फिर अपनी राजनीति का जादू चलाया और लोगों को अपनी ओर खींचा. जनता ने भी उन पर भरोसा जताया और 2017 में उन्हें पांचवी बार विधायक की कुर्सी पर बैठाया.
दरअसल इस सीट पर भी दलित मतदाताओं की ज्यादा संख्या बसपा को जीत दिलाने में मददगार साबित होती है. यहां पर दलित मतदाताओं के वोट बसपा की झोली में चले जाते हैं. दलितों के अलावा यहां पर ब्राह्मण, कुर्मी, राजभर और निषाद मतदाताओं की संख्या भी अच्छी है. ऐसे में ये जातिया भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करती हैं.
यहां पर कुल मतदाता 268672 हैं. इनमें महिला मतदाता 123570, पुरुष मतदाता 145089 और थर्ड जेंडर 13 हैं.
सौजन्य : News18
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