कानपुर कमिश्नर के जरिए भाजपा ने खेला दलित कार्ड, असीम अरूण का VRS हुआ मंजूर
कानपूर न्यूज़ : बीते शनिवार तक कानपुर कमिश्नर रहे असीम अरूण का प्रोफाईल अब बदल चुका है। वह भाजपा नेता बन गये। बताया जा रहा कि शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ बुलाकर मुलाकात की और फिर अमित शाह से फोन पर बात कराई गई। इस बातचीत के बाद असीम ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया था। कहा यह भी जा रहा कि उनके जरिए भाजपा ने दलित कार्ड खेला है। कमिश्नर कानपुर द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद शहर के लिए कमिश्नर की तलाश तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग को तीन अधिकारियों का पैनल भेजा है। एडीजी लॉ एण्ड आर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि कानपुर नगर में पुलिस आयुक्त को नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होने यह भी कहा कि असीम वीआरएस का आवेदन करने के बाद छुट्टी पर चले गये हैं।
प्रदेश अध्यक्ष से मिले असीम अरूण वीआरएस मंजूर होने से पहले पूर्व कमिश्नर असीम अरूण ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। यहां भाजपा ममें शामिल करने के लिए उन्होने सीएम योगी और उनका आभार भी जताया। असीम को कन्नौज की सदर सीट से चुनाव लड़ाने की चर्चा है। चर्चा यह भी है कि आगे उन्हें मंत्रीमंडल में भी शामिल करने की सुगबुगाहट भी तेज है। भाजपा का दलित कार्ड भारतीय जनता पार्टी ने असीम अरूण के जरिए दलित कार्ड खेला है। बता दें किि असीम अरूण का पैतृक निवास कन्नौज ही है और वह दलित समाज से आते हैं। साफ सुथरी छवि वाले पूर्व कमिश्नर का कन्नौज में ठीकठाक जनाधार भी बताया जा रहा है। सूत्रों की अगर माने तो बताया जा रहा की असीम अरूण कन्नौज का यह रण एकतरफा जीत सकते हैं। बाकी उनका कुछ विरोधाभास भी है, जो समय पर सामने आएगा।
कौन हैं असीम अरूण? एडीसी ऑफिसर रैंक के असीम अरुण 1994 बैच के IPS अधिकारी हैं। तीन अक्टूबर 1970 को इनका जन्म बदायूं में हुआ था। इनके पिता श्री राम अरुण की गिनती भी प्रदेश के तेजतर्रार आइपीएस में होती थी। वह प्रदेश के DGP का पद भी संभाल चुके हैं। असीम अरुण की मां शशि अरुण जानी-मानी लेखिका हैं। उनने लखनऊ के सेंट फ्रांसिस कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बीएससी किया है। आईपीएस असीम अरुण (IPS Aseem Arun) ने सिविल सर्विसेज में हाथ आजमाया। इसका कारण था कि पिता इन्हें अपनी तरह आइपीएस अफसर ही बनते हुए देखना चाहते थे। आइपीएस अफसर बनने के बाद असीम अरुण धीरे-धीरे यूपी पुलिस की रीढ़ बनते गए।
सौजन्य : Jan jwar
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