स्टूडेंट्स के साथ खाने-पीने, पढ़ने, खेलकूद, पानी आदि में नहीं होगा भेदभाव
किशनगढ़ समेत राज्य के सरकारी कॉलेजों में अब अनुसूचित जाति आयोग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की सख्त पालना कराई जाएगी। प्रदेश के जालोर में नौ वर्षीय दलित छात्र की मौत और उदयपुर में दलित छात्राओं की ओर से खाना परोसने के बाद उसे फेंकने की घटनाओं से सबक लेकर कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने अब कॉलेजों के स्टूडेंट्स को इस संबंध में जागरूक करने का निर्णय किया है।
इसके लिए सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को अनुसूचित जाति आयोग की ओर से पालना करवाने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें स्टूडेंट्स के साथ खाने-पीने, पढ़ने, खेलकूद, पेयजल व्यवस्था समेत अन्य कार्यों में किसी तरह का भेदभाव नहीं करने को कहा गया है। कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक अकादमिक डॉ. शैला महान की ओर से इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
कॉलेजों में नहीं एक भी उदाहरण
प्रदेश में दलित बच्चों के साथ भेदभाव के उदाहरण कॉलेजों में नहीं है। केवल स्कूलों में ही ऐसी घटनाएं हुई है। दौसा के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित गवर्नमेंट सीनियर सैकेंडरी स्कूल कैलाई में पढ़ने वाले रोहित महावर (10) के पिता विनोद महावर ने 25 अगस्त को आरोप लगा था कि स्कूल में पांच अगस्त को शिक्षक रामेश्वर प्रसाद ने उसके बेटे को बेरहमी से लात मारी थी। बाड़मेर में भी एक दलित बच्चे को पीटने का मामला सामने आया था।
बाड़मेर के सरकारी स्कूल में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले स्टूडेंट की टीचर ने पिटाई कर दी। बच्चे का दोष इतना था कि उसने क्लास टेस्ट में पूरे सवालों का जवाब नहीं दिया था। जालोर के सुराणा गांव में कथित रूप से पानी का मटका छूने पर एक प्राइवेट स्कूल के 9 वर्षीय छात्र इंद्र मेघवाल की 20 जुलाई को पिटाई की गई थी। इसके बाद अहमदाबाद के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसी साल दो सितम्बर को उदयपुर जिले की एक स्कूल में दलित छात्राओं की ओर से मिड डे मील परोसने से नाराज एक कुक ने खाना फिंकवा दिया था। इन सभी मामलों में कार्यवाही हुई, लेकिन इसके लिए अब स्टूडेंट्स को भी जागरुक किया जा रहा है।
अब यह करना होगा
कॉलेज शिक्षा विभाग की ओर से सभी प्राचार्यों से कहा गया है कि वे स्टूडेंट्स को एट्रोसिटी एक्ट की जानकारी देने के साथ कॉलेज स्टॉफ को संवेदनशील बनाएं। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कॉलेजों में स्टूडेंट्स के साथ खाने-पीने, पढ़ने, खेलकूद, पेयजल व्यवस्था समेत अन्य कार्यों में किसी तरह का भेदभाव नहीं हो। साथ ही अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 यथा संधोधित 2015 एवं 2016 के प्रावधनों की कठोरता से पालना करवाई जाएं।
सौजन्य : Dainik bhaskar
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