आदिवासियों के अस्तित्व और अस्मिता पर हो रहा हमला
गोविन्दपुर। आदिवासी समाज के अस्तित्व और अस्मिता पर आरएसएस-भाजपा राज में हमला हो रहा है। आदिवासियों और वन निवासियों की पुश्तैनी वन भूमि पर अधिकार के लिए आए वनाधिकार कानून को लागू नहीं किया गया। तीनों कृषि कानून आदिवासी और किसान विरोधी हैं। यह बात गुरुवार को रासपहरी में आइपीएफ के अनिश्चितकालीन धरने के अड़तीसवें दिन वक्आतों ने कहा। कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन का कानून किसी भी पूंजीपति को धान, गेहूं, दाल, सब्जियों, तेल जैसे खाद्य पदार्थो के असीम भण्डारण का अधिकार देता है।
ठेके पर खेती को देने और किसान से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी को खत्म करने वाले कानून हमारी खाद्यान्न श्रृखंला को खत्म कर देंगे और खेती की जमीनें पूंजी घरानों के हाथों चली जाएंगी। कहा कि आदिवासी समाज को रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार के अभाव में दुद्धी के लगभग हर गांव से बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। मनरेगा ठप पड़ी है और जो काम कराए गए, उनकी भी मजदूरी बकाया है। आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बुरा है। शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं हो सकी।
यहीं नहीं कोल समेत बहुतेरी आदिवासी जाति को तो आज तक जनजाति का दर्जा ही नहीं मिला। कहा कि आदिवासियों के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के लिए जन राजनीति की जरूरत है कारपोरेट पक्षधर राजनीति से आदिवासी समाज का भला नहीं होगा। धरने में आइपीएफ जिला संयोजक कृपा शंकर पनिका, मजदूर किसान मंच जिलाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, मंगरू प्रसाद गोंड़, ज्ञानदास गोंड़, करम सिंह गोंड़, नानागुड़ी, रामनरेश गोंड़, नंदलाल गोंड़, देवन्ती देवी, चरन सिंह गोंड़, धनपत गोंड़, फूलपती देवी, गीता देवी आदि लोग मौजूद रहे।
सौजन्य : livehindustan
नोट : यह समाचार मूलरूप से www.livehindustan.com में प्रकाशित हुआ है. मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है !









