दो चुनाव आयुक्तों की शिकायतों पर कार्रवाई के बजाय कैबिनेट सचिव ने ज्ञानेश कुमार को भेजा उनका पत्र: आरटीआई
दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को पत्र लिखकर काम के बंटवारे में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि उनकी सलाह के विरुद्ध बदलाव किए गए, जिनके कारण महत्वपूर्ण निगरानी ख़त्म हो गई है. अब आरटीआई के तहत पता चला है कि कैबिनेट सचिव ने इन पत्रों में उठाए गए मुद्दों पर कोई कार्रवाई करने के बजाय इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भेज दिया था|
नई दिल्ली: बीते सितंबर महीने में अंग्रेजी अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की पत्रकार रीतिका चोपड़ा द्वारा की गई एक पड़ताल में सामने आया था कि भारत चुनाव आयोग के भीतर ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) को लेकर असंतोष है. दो चुनाव आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को पत्र लिखकर काम के बंटवारे में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई थी.
उनका कहना था कि इन बदलावों के कारण महत्वपूर्ण निगरानी खत्म हो गई है, जबकि उन्होंने ऐसा न करने की सलाह दी थी|
अब सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि कैबिनेट सचिव ने इन पत्रों में उठाए गए मुद्दों पर कोई कार्रवाई करने के बजाय, इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भेज दिया|
कैबिनेट सचिव ने चुनाव आयुक्तों के पत्रों को ‘व्यक्तिगत हैसियत’ में लिखा गया माना
इसके अलावा, कैबिनेट सचिव सोमनाथन ने इस तथ्य को स्वीकार किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त समान हैसियत रखते हैं तथा किसी भी निर्णय को सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए. इसके बावजूद उन्होंने दोनों चुनाव आयुक्तों के पत्रों को उनकी व्यक्तिगत हैसियत में भेजे गए पत्र माना. जबकि, दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा एक ही मुद्दा उठाए जाने से उन्हें स्वतः ही मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार के मुकाबले बहुमत प्राप्त हो जाता था.
पारदर्शिता के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा को मिले आरटीआई जवाब में बताया गया है कि कैबिनेट सचिव ने 5 अगस्त को दोनों पत्रों की प्राप्ति स्वीकार की थी. इसके बाद कैबिनेट सचिव ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त की राय लेने का फैसला किया. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कैबिनेट सचिवालय को कोई जवाब दिया है या नहीं|
आरटीआई के जवाब से पता चलता है कि कैबिनेट सचिव सोमनाथन ने कहा था, ‘उपरोक्त पत्र चुनाव आयुक्तों की व्यक्तिगत हैसियत में भेजे गए हैं. हालांकि, इन्हें पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन इन्हें पूरे आयोग की ओर से भेजा गया औपचारिक पत्र नहीं माना जा सकता.’
हालांकि, इसी पत्राचार में सोमनाथन ने यह भी कहा था, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुसार, आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए. अगर मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त किसी विषय पर अलग-अलग राय रखते हैं, तो उस विषय पर बहुमत की राय के अनुसार निर्णय लिया जाएगा.’
उन्होंने आगे कहा था, ‘इसमें यह भी कहा गया है कि आयोग सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के जरिए अपने कामकाज के संचालन की प्रक्रिया निर्धारित कर सकता है. इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त समान हैसियत रखते हैं तथा किसी भी निर्णय को सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए.’
आरटीआई के जवाब में दोनों पत्रों की प्रतियां भी शामिल हैं. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ये पत्र अलग-अलग 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को भेजे थे|
दोनों पत्रों में वरिष्ठ चुनाव उपायुक्त मनीष गर्ग का उल्लेख है. गर्ग को प्रशासन प्रभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, क्योंकि इस प्रभाग के प्रभारी भानु प्रकाश येतुरु 27 जुलाई से 9 अगस्त तक अवकाश पर थे|
पत्रों में कहा गया है कि प्रशासन प्रभाग के संपर्क अधिकारी (लिंक ऑफिसर) के रूप में कार्यभार संभालने के ‘कुछ ही घंटों के भीतर’ गर्ग ने वरिष्ठ चुनाव उपायुक्तों, चुनाव उपायुक्तों और समकक्ष अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे से संबंधित एक आदेश जारी कर दिया. ऐसा करने से पहले उन्होंने न तो दोनों चुनाव आयुक्तों से ‘चर्चा की’ और न ही उन्हें इसकी ‘जानकारी दी’.
पत्रों में कहा गया है कि कामकाज के बंटवारे से संबंधित यह आदेश उस स्थिति में जारी किया गया, जब सभी संबंधित अधिकारियों को बार-बार मौखिक और लिखित रूप से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि चुनाव आयोग को सूचित किए बिना इस तरह के कदम नहीं उठाए जाने चाहिए|
29 जुलाई को सोमनाथन को लिखे अपने पत्र में संधू ने बताया कि मनीष गर्ग को 2 सितंबर, 2024 से वरिष्ठ चुनाव उपायुक्त के पद पर तैनात किया गया था. वहीं, भानु प्रकाश येतुरु प्रशासन के प्रभारी चुनाव उपायुक्त थे और उनके नामित संपर्क अधिकारी एक अन्य चुनाव उपायुक्त संजय कुमार थे|
पत्र में दी गई तारीख से एक दिन पहले, 28 जुलाई को मनीष गर्ग को भानु प्रकाश येतुरु का प्रभार सौंप दिया गया था, क्योंकि येतुरु अवकाश पर चले गए थे. इसके कुछ ही घंटों के भीतर गर्ग ने चुनाव आयोग को सूचित किए बिना कामकाज का पुनः बंटवारा कर दिया|
ज्ञात हो कि चुनाव आयोग में दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित तीनों की समान भूमिका है और आयोग को बहुमत के आधार पर निर्णय लेकर काम करना होता है|
सुखबीर सिंह संधू के पत्र में कहा गया है, ‘चुनाव उपायुक्त (प्रशासन) के संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर, श्री मनीष गर्ग, आईएएस ने वरिष्ठ चुनाव उपायुक्तों, चुनाव उपायुक्तों, महानिदेशकों और समकक्ष अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे से संबंधित एक आदेश जारी कर दिया (प्रति संलग्न है). उन्होंने काम के इस नए बंटवारे के बारे में आयोग या मुझे (हस्ताक्षरकर्ता को) न तो कोई जानकारी दी और न ही कोई चर्चा की.’
पत्र में आगे कहा गया, ‘उक्त आदेश में उन्होंने अपने साथ-साथ अपने से वरिष्ठ और उनके समकक्ष अधिकारियों को भी काम सौंप दिया. मनीष गर्ग, आईएएस ने इससे पहले भी ऐसे ही आदेश जारी किए थे, जब वह चुनाव उपायुक्त (प्रशासन) के रूप में कार्यरत थे.’
संधू ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि येतुरु ने अवकाश पर जाने से पहले कामकाज के बंटवारे से संबंधित ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया था|
पत्र में कहा गया, ‘इसी तरह, उनके मूल लिंक अधिकारी संजय कुमार, आईएएस ने भी ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया था. इसके परिणामस्वरूप, 28 जुलाई, 2026 को चुनाव उपायुक्त (प्रशासन) के संपर्क अधिकारी का प्रभार अचानक वरिष्ठ चुनाव उपायुक्त (मनीष गर्ग) को सौंप दिया गया और उन्होंने तुरंत ऊपर उल्लिखित आदेश जारी कर दिया.’
संधू के पत्र के अनुसार, यह सब आयोग की पूर्व चर्चा या मंजूरी के बिना ऐसे कदम उठाने के खिलाफ संबंधित अधिकारियों को उनके द्वारा बार-बार दिए गए स्पष्ट मौखिक और लिखित निर्देशों के बावजूद हुआ|
पत्र में कहा गया, ‘यह न केवल आयोग की स्थापित पुरानी परंपरा के विपरीत है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18(1) और 18(2) का भी स्पष्ट उल्लंघन है.’
दोनों चुनाव आयुक्तों ने समान चिंताएं जताईं
इसी दिन विवेक जोशी ने भी सोमनाथन को एक अलग पत्र लिखकर गर्ग द्वारा नया प्रभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर जारी किए गए कामकाज के बंटवारे से संबंधित आदेशों का मुद्दा उठाया|
जोशी के पत्र की भाषा लगभग संधू के पत्र जैसी ही है. हालांकि, जोशी ने एक अतिरिक्त बात लिखी कि कामकाज का बंटवारा न केवल आयोग को सूचित किए बिना किया गया, बल्कि जब उन्होंने संबंधित फाइल देखने की मांग की, तो उन्हें वह फाइल भी उपलब्ध नहीं कराई गई|
जोशी के पत्र में कहा गया, ‘इसके अलावा, जब मैंने प्रशासन विभाग (Administration Division) से संबंधित फाइल मांगी, तो वह मुझे नहीं दी गई. उक्त आदेश में, उन्होंने खुद को भी काम सौंपा और साथ ही उन अधिकारियों को भी काम आवंटित किया, जो उनसे वरिष्ठ हैं या उनके बराबर के पद पर हैं. मनीष गर्ग, आईएएस ने इससे पहले भी एक बार ऐसे ही आदेश जारी किए थे, जब वह चुनाव उपायुक्त (प्रशासन) के रूप में कार्यरत थे.’
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कैबिनेट सचिव को लिखे गए संधू और जोशी के पत्र सामान्य प्रक्रिया से बिल्कुल अलग थे. इन पत्रों में उन्होंने मतदाता सॉफ्टवेयर ‘ECINet’ की विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई थी. काम के बंटवारे में बदलाव के कारण मतदाता सूची के आईटी सिस्टम की निगरानी करने वाली एक लेयर ही खत्म हो गई थी|
संधू और जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र सामान्य परंपरा से एक बड़ा विचलन थे. दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाताओं से जुड़े सॉफ्टवेयर ECINet की विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई थी. कामकाज के बंटवारे में किए गए बदलावों के परिणामस्वरूप मतदाता सूची से संबंधित तकनीकी व्यवस्था पर निगरानी की एक महत्वपूर्ण लेयर प्रभावी रूप से समाप्त हो गई थी|
अलग से, हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट किया था कि चुनाव उपायुक्त संजय कुमार, जिनके माध्यम से चुनाव आयोग के महानिदेशक (आईटी) फाइलें भेज रहे थे, को गर्ग के निर्देश पर उस जिम्मेदारी से हटा दिया गया था. इसके बाद गर्ग ने खुद उन फाइलों की निगरानी शुरू कर दी|
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा था कि संजय कुमार को हटाने और फाइलें गर्ग के पास भेजने का निर्देश ‘वास्तव में लागू नहीं किया गया था.’
हालांकि, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि अगस्त में संजय कुमार को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया और महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना की फाइलें गर्ग के माध्यम से चुनाव आयुक्तों तक भेजी जाने लगीं|
द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में यह भी बताया गया था कि सीमा खन्ना और आईटी विभाग ने ऐसी व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत महत्वपूर्ण अधिकारियों- निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (Deputy ERO) – की मतदाता डेटाबेस तक पहुंच रोक दी गई थी. इसी डेटाबेस के माध्यम से मतदाताओं के नाम जोड़े और हटाए जाते हैं|
सौजन्य : समाचार
माध्यम : समाचार पत्र







