मध्य प्रदेश में दलितों पर अत्याचार का बढ़ता ग्राफ, सागर और ग्वालियर में सबसे बुरा हाल
देश में दलितों पर अत्याचार के मामले में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश, रतलाम सांसद के सवाल पर संसद में केंद्र सरकार ने दी जानकारी.
भोपाल: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने मध्य प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ा दी है. लोकसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष 3 राज्यों में शामिल रहा. इस दौरान प्रदेश में दलितों के खिलाफ 8,232 मामले दर्ज हुए, जबकि सागर और ग्वालियर जिले सबसे बड़े हॉटस्पाट बनकर उभरे. वहीं आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में भी मध्य प्रदेश की स्थिति गंभीर बनी हुई है.दलितों पर अत्याचार में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेशलोकसभा में मध्य प्रदेश के रतलाम से सांसद अनीता नागर सिंह चौहान के सवाल के लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि “वर्ष 2023 में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराधों के सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में 15,130 दर्ज किए गए. इसके बाद राजस्थान में 8,449 और मध्य प्रदेश में 8,232 मामले सामने आए. आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में पिछले तीन वर्षों से अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. वर्ष 2021 में 7,214 मामले दर्ज हुए थे, जो 2022 में बढ़कर 7,733 और 2023 में 8,232 तक पहुंच गए.सागर और ग्वालियर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलेजिला स्तर के आंकड़ों में सागर सबसे संवेदनशील जिला बनकर उभरा है. वर्ष 2023 में यहां अनुसूचित जाति के खिलाफ 666 मामले दर्ज हुए, जबकि 2021 में यह संख्या 509 थी. इसके बाद ग्वालियर में 569 मामले दर्ज किए गए. शिवपुरी में 404, विदिशा में 345 और छतरपुर में 315 मामले सामने आए. खास बात यह है कि बुंदेलखंड और चंबल अंचल के कई जिले लगातार इस सूची में बने हुए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और उत्पीड़न की गंभीर स्थिति सामने आती है|
आदिवासियों के खिलाफ अपराध, धार और छिंदवाड़ा आगेअनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपराधों में भी मध्य प्रदेश की स्थिति संतोषजनक नहीं है. वर्ष 2023 में राज्य में 2,858 मामले दर्ज किए गए. जिला स्तर पर छिंदवाड़ा में सबसे अधिक बढ़ोत्तरी दर्ज हुई, जहां 2021 के 82 मामलों की तुलना में 2023 में 149 मामले सामने आए. जबलपुर में 122, धार में 114 और सिवनी में 105 मामले दर्ज हुए. ऐसे में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे अपराध प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं.चार्जशीट की रफ्तार पर भी उठे सवालदलित एवं बहुजन समाज के नेता दामोदर यादव के अनुसार रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अपराध दर्ज होने की तुलना में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है. वर्ष 2023 में दर्ज 8,232 मामलों के मुकाबले 8,029 मामलों में ही चार्जशीट दाखिल की जा सकी. कई मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया में देरी होने से पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावी कार्रवाई और त्वरित न्याय के बिना ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना कठिन होगा|
अधिकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून बेअसरकेंद्र सरकार ने संसद में बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सिविल राइट्स एक्ट 1955 और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 जैसे सख्त कानून लागू हैं. राज्यों को नियमित निगरानी, विशेष अदालतों, जागरूकता अभियान और त्वरित कार्रवाई के निर्देश भी दिए जाते हैं. इसके बावजूद मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ते मामलों ने इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं|
सौजन्य :इटीवी
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