ग्रामीण भारत में दलितों पर अत्याचार अब भी जारी हैं: आठवले
पुणे: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने रविवार को कहा कि देश के ग्रामीण इलाकों में दलितों के खिलाफ अत्याचार अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
जस्टिस न्यूज
उन्होंने राज्य सरकारों और राजनीतिक नेताओं से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आठवले ने बताया कि अगले साल रायगढ़ के महाड में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक आंदोलन के 100 साल पूरे हो जाएंगे। इस आंदोलन में दलितों को सार्वजनिक तालाब से पानी लेने के अधिकार के लिए संघर्ष किया गया था।
उन्होंने कहा, “अगले साल छुआछूत के खिलाफ हुए आंदोलन की शताब्दी मनाई जाएगी। हालांकि पिछली एक सदी में बहुत कुछ बदला है और काफी प्रगति भी हुई है, फिर भी ग्रामीण इलाकों में दलितों को अब भी अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है। यह ज़रूरी है कि राज्य सरकारें, राजनीतिक दल और स्थानीय NGO मिलकर काम करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।”
आठवले ने आगे कहा कि वह और उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम दलितों और अन्य समुदायों—जिनमें सवर्ण, OBC, मराठा और अल्पसंख्यक शामिल हैं—को एक साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। यही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का सपना था, और हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
चार राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर टिप्पणी करते हुए आठवले ने कहा कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि इसके बजाय BJP का समर्थन करेगी।
आठवले ने कहा, “केरल में हम 10-12 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे; तमिलनाडु में 20-25 सीटों पर; और असम में 15-20 सीटों पर। जहाँ भी हम चुनाव लड़ेंगे, वह हमारी पार्टी के चुनाव चिह्न पर ही होगा। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में हम अपने उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, वहाँ हम BJP का समर्थन करेंगे।”









