भारत ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की कानूनी परिभाषा को व्यापक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसका क्या मतलब है?
इस संशोधन से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान के लिए और भी स्पष्ट मानदंड तय होने की उम्मीद है, जिससे सरकार का कहना है कि कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।
जस्टिस न्यूज
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन के एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी। इसका उद्देश्य देश में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की परिभाषा का विस्तार करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों का मकसद कानून को और अधिक समावेशी बनाना है, ताकि व्यक्तियों का एक व्यापक वर्ग इस कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों, सुरक्षा और कल्याणकारी उपायों का लाभ उठा सके।
इस संशोधन से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान के लिए और भी स्पष्ट मानदंड तय होने की उम्मीद है, जिससे सरकार का कहना है कि कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।
समुदाय के नेताओं ने कानून के कार्यान्वयन को लेकर लगातार चिंताएँ जताई हैं, जिसके चलते इसकी प्रभावशीलता पर लगातार चर्चाएँ हो रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी कानून के प्रावधानों को लागू करने में हो रही देरी को लेकर चिंता व्यक्त की है।
हालाँकि मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन संशोधन के विस्तृत प्रावधानों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019, जो 10 जनवरी, 2020 को लागू हुआ था, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता प्रदान करता है, भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और इस समुदाय के लिए कल्याणकारी उपायों को अनिवार्य बनाता है। इस कानून को लागू करने के नियम सितंबर 2020 में अधिसूचित किए गए थे।
वर्तमान कानून के तहत, एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसकी लैंगिक पहचान उसके जन्म के समय निर्धारित लिंग से मेल नहीं खाती है। अधिनियम की धारा 2 में इस संबंध में महत्वपूर्ण परिभाषाएँ दी गई हैं कि कौन व्यक्ति ट्रांसजेंडर की श्रेणी में आता है।
इस परिभाषा में ट्रांस पुरुष और ट्रांस महिलाएँ, इंटरसेक्स विभिन्नताओं वाले व्यक्ति, जेंडर क्वीयर व्यक्ति, हिजड़ा और अन्य लोग शामिल हैं। यह कानून इस बात पर निर्भर नहीं करता कि किसी व्यक्ति ने लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी (sex reassignment surgery) करवाई है या हार्मोन थेरेपी ली है। इसके अलावा, यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए यह भी अनिवार्य करता है कि वे एक ‘ट्रांस व्यक्ति’ के रूप में प्रमाणित होने के लिए ज़िला मजिस्ट्रेट और ज़िला स्क्रीनिंग समिति की प्रक्रिया से गुज़रें।
2011 की जनगणना के अनुसार, देश में 4.80 लाख से अधिक ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परिभाषा में और अधिक स्पष्टता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक लाभार्थियों को कानून के तहत मिलने वाली सुरक्षा और लाभ प्राप्त हों।









