क्यों जरूरी है आज देश में हजारों सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख???
आज से डेढ़ सौ साल पहले जब जाति व्यवस्था चरम पर थी, वर्ण व्यवस्था के हिसाब से काम होता था महिलाओं को शिक्षा से दूर रखा जाता था खासकर दलित आदिवासी पिछड़े समाज की महिलाओं को शिक्षा प्रतिबंधित था l
अनूप श्रमिक, जस्टिस न्यूज
समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की थी सतीप्रथा का चलन था। उस दौर में सावित्री बाई फुले,फातिमा शेख ज्योतिबा फुले के मदत से महिलाओं में शिक्षा और सामाजिक चेतना देने का काम की..
साथ ही साथ महिलाओं के लिए अंग्रेजी कानूनों जैसे सती प्रथा उन्मूलन, हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856):
सहमति आयु अधिनियम (1891)
बाल विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा अधिनियम, 1930) यह कानून बाल विवाह को रोकने के लिए लाया गया, जिसने लड़कियों के लिए विवाह की कानूनी उम्र बढ़ाई
कन्या भ्रूण हत्या पर रोक: इस कुप्रथा को भी गैरकानूनी घोषित किया गया
विरासत अधिकार: महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देने और उनके वित्तीय सुरक्षा के लिए भी कानून बनाए गए
*मताधिकार (वोट का अधिकार)
ब्रिटिश महिलाओं को तुरंत पूर्ण मताधिकार नहीं मिला 1918 में, 30 वर्ष से अधिक उम्र की कुछ शर्तों (संपत्ति आदि) के साथ वोट देने का अधिकार मिला
1928 में, महिलाओं को पुरुषों के समान 21 वर्ष की आयु में वोट देने का समान अधिकार प्राप्त हुआ.
अन्य सुधार:
महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया गया और लड़कियों के लिए स्कूल खोले गए.
महिलाओं को सार्वजनिक सेवा और शिक्षा में भागीदारी के लिए धीरे-धीरे अवसर मिले.
ये कानून भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों (जैसे बाल विवाह, सती प्रथा) को खत्म करने और महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थे, भले ही ये प्रक्रिया धीमी और संघर्षपूर्ण रही हो.
जिसका परिणाम रहा कि आजादी के बाद से अबतक देश की हर वर्ग की महिलाएं शिक्षा,रोजगार, खेल, रक्षा,पुलिस, वैज्ञानिक, राजनीति, लेखन आदि आदि जगहों पर अपना वजूद बना चुकी है। लेकिन पिछले एक दशक से मनुवादी और कठमुल्लावादी ताकते महिलाओं को जाति,धर्म,सामाजिक कुरीतियों में धकेलने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं जिसका परिणाम है देश के महिला हिंसा,जाति और धर्म के आधार महिलाओं का प्रताड़ना,बलात्कार,यौन हिंसा, एसिड अटैक, महिला ट्रैफिकिंग, जैसी घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है,
महिलाओं के पहनावे को लेकर घुघट,पर्दा हिजाब जैसे चलन को पुरुषवादी समाज की तरफ से बढ़ावा मिल रहा है
करोड़ों महिलाएं बच्चियां देह व्यापार करने को मजबूर है
यही नहीं देश में पिछले बारह सालों में लगभग 50 लाख महिलाएं और बेटियां देश में गायब है जिसकी रिपोर्ट एनसीआरबी और गृह मंत्रालय ने भी दिया है
अतः वर्तमान दौर में जरूरत है कि भारत में महिलाओं के सामाजिक,आर्थिक,धार्मिक अधिकारो को लेकर नारीवादी आंदोलनों को तेज करने की जरूरत है जिसके लिए देश में हजारों सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख की जरूरत है।ताकि आधी आबादी का वजूद जिंदा रहे..









