ग्वालियर: अनिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज कराने वाले दलित नेता मकरंद बौद्ध गिरफ्तार, पुराने मामले में वारंट जारी होने पर पुलिस ने भेजा जेल
अधिवक्ता अनिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले मुख्य शिकायतकर्ता थे मकरंद बौद्ध। 2016 के वारंट पर पुलिस ने लिया एक्शन, दलित संगठनों ने बताया साजिश; वकीलों के बाद अब दूसरे पक्ष पर कार्रवाई।
ग्वालियर में अंबेडकर पोस्टर विवाद के बीच बड़ी कार्रवाई। शिकायतकर्ता दलित नेता मकरंद बौद्ध पुराने मामले में गिरफ्तार। जानिए पुलिस ने इसे साजिश क्यों नहीं माना।
ग्वालियर (मध्य प्रदेश): संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोस्टर विवाद को लेकर ग्वालियर में चल रही गहमागहमी के बीच सोमवार को एक नया मोड़ आ गया। पुलिस ने इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता और दलित नेता मकरंद बौद्ध को गिरफ्तार कर लिया है। मकरंद बौद्ध वही शख्स हैं जिन्होंने अधिवक्ता अनिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस ने मकरंद बौद्ध को सोमवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई 2016-17 के एक पुराने मामले में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर की गई है। वहीं, दलित संगठनों ने इसे पुलिस की साजिश करार दिया है।
थाने गए थे चर्चा करने, पुराना वारंट बना गिरफ्तारी की वजह
घटनाक्रम के अनुसार, दलित नेता मकरंद बौद्ध सोमवार को किसी मामले में चर्चा करने के लिए ग्वालियर के विश्वविद्यालय पुलिस थाने पहुंचे थे। वहां मौजूद एक सिपाही ने थाना प्रभारी (SHO) रविंद्र कुमार को जानकारी दी कि मकरंद बौद्ध के खिलाफ वर्ष 2016-17 का एक पुराना मामला लंबित है। इस मामले में उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 और 146 के तहत आरोप हैं।
बताया गया कि मकरंद लगातार इस पुराने मामले में कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे, जिसके चलते न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ वारंट जारी किए गए थे। अभी कुछ दिन पहले ही उनके नाम का एक गिरफ्तारी वारंट भी निकला था। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने अपनी टीम को तत्काल वारंट का पालन करने और मकरंद बौद्ध को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।
बराबरी पर आया मामला? पुलिस की रणनीति पर अटकलें
मकरंद बौद्ध के जेल जाने के बाद अंबेडकर पोस्टर विवाद में अब दोनों पक्ष एक ही स्थिति में नजर आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पुलिस ने शांति व्यवस्था बहाल करने और दोनों गुटों को शांत करने के लिए यह रणनीति अपनाई है, जिसके तहत दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
गौरतलब है कि ग्वालियर में पिछले काफी समय से डॉ. अंबेडकर को लेकर दो गुट आमने-सामने हैं। एक पक्ष अंबेडकर के समर्थन में अभियान चला रहा है, जबकि दूसरा पक्ष विरोध में खड़ा है।
क्या था पूरा विवाद?
बुधवार को दलित नेता मकरंद बौद्ध ने डॉ. अंबेडकर के एक पोस्टर को जलाने की घटना को लेकर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत पर पुलिस ने अधिवक्ता अनिल मिश्रा और सात अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने गुरुवार रात कार्रवाई करते हुए अधिवक्ता अनिल मिश्रा और चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
रविवार को हुई अदालती सुनवाई के दौरान जज ने टिप्पणी की थी कि शिकायतकर्ता को भी अपनी बात रखने का अधिकार है और पुलिस को कार्यवाही के संबंध में मकरंद बौद्ध को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था।
पुलिस और दलित संगठनों के अपने-अपने दावे
इस गिरफ्तारी पर एएसपी विदिता डागर ने स्पष्ट किया कि मकरंद बौद्ध की गिरफ्तारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल पुराने लंबित वारंट के निष्पादन पर आधारित है।
दूसरी ओर, दलित संगठन इस कार्रवाई से नाराज हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने सुनियोजित साजिश के तहत शिकायतकर्ता को ही निशाना बनाया है और उन्हें जेल भेजा है।
सौजन्य :द मूकनायक
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