दलित नाबालिग लड़की से बलात्कार और उत्पीड़न के आरोपी 3 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
अलवर: एक स्थानीय पोक्सो अदालत ने शनिवार को एक नाबालिग दलित लड़की से बलात्कार और उत्पीड़न के आरोपों के बाद रैणी थाने के तीन कांस्टेबलों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
जस्टिस न्यूज
आरोपियों की पहचान कांस्टेबल अविनाश मीणा उर्फ सनी, राजवेंद्र उर्फ राजू और मान सिंह के रूप में हुई है। इन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम और एससी/एसटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप हैं।
अविनाश पर बलात्कार का आरोप है, जबकि अन्य दो पर छेड़छाड़ और उत्पीड़न का आरोप है।
नवंबर 2023 के इस मामले में शुरुआत में रैणी थाने ने जांच की और एक अंतिम रिपोर्ट (एफआर) दाखिल की, जिसमें आरोपी पुलिसकर्मियों को निर्दोष बताया गया। मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब बलात्कार पीड़िता ने अदालत में एफआर को चुनौती दी, जिसके बाद न्यायाधीश ने जांच के दौरान पेश किए गए सबूतों की समीक्षा की।
बाद की कार्यवाही के दौरान, पोक्सो अदालत ने पुलिस से आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा सहित कई जानकारियां मांगीं।
मोबाइल फ़ोन कॉल और चैट संदेशों से मिले सबूत अदालत द्वारा तीनों पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी को मंज़ूरी देने के फ़ैसले में अहम साबित हुए।
विशेष लोक अभियोजक विनोद कुमार ने कहा कि नाबालिग लड़की, जिसे शुरुआत में आरोपी पुलिसकर्मियों ने शिकायत दर्ज न करने की धमकी दी थी, ने आखिरकार अपने अपराधियों के ख़िलाफ़ बहादुरी से कदम उठाया। उन्होंने कहा कि उसके दावों की पुष्टि तब हुई जब तीनों आरोपियों के मोबाइल फ़ोन लोकेशन डेटा से पता चला कि घटना वाले दिन वे उसके किराए के घर पर मौजूद थे।
बाद में अदालत ने नाबालिगों, ख़ासकर हाशिए के समुदायों के बच्चों, के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर ज़ोर देते हुए स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों को दी गई क्लीन चिट को खारिज कर दिया।
तीनों आरोपी पुलिसकर्मियों में से, कांस्टेबल अविनाश पर आईपीसी और पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत सबसे गंभीर आरोप हैं। उन पर आईपीसी की धारा 354ए (यौन उत्पीड़न), 506 (आपराधिक धमकी), 363 (अपहरण), 366 (महिला को शादी के लिए मजबूर करने के इरादे से अपहरण) और 376 (बलात्कार) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
पॉक्सो अधिनियम की कठोर धाराएँ भी उन पर लागू की गई हैं।
कांस्टेबल राजवेंद्र और मान सिंह पर भी आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत कई आरोप हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी शामिल हैं।









