मायावती हाथ में लें नेतृत्व, दलित समाज को करें एकजुट… मोदी सरकार के मंत्री के बयान का मतलब क्या?
दलित वोट बैंक की राजनीति एक बार फिर गहराने लगी है। यूपी चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा जोर पकड़ता दिख रहा है। मोदी सरकार के मंत्री के बयान की चर्चा है।
लखनऊ: रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने देश में दलित राजनीति को एकजुट करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में दलित राजनीतिक दलों का कोई गठबंधन बनता है, तो उसका नेतृत्व बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को करना चाहिए। रामदास अठावले के इस बयान को यूपी की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, यूपी चुनाव 2027 से पहले दलित राजनीति को लेकर खूब चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स के काट के तौर पर मायावती को दलितों के बीच फिर से मजबूत होने की चर्चा तेज हो गई है।
रामदास आठवले अपनी अलग भाषण शैली और बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। यूपी चुनाव से पहले उन्होंने मायावती को दलितों का नेता बताकर एक बड़ा दांव खेल दिया है। दरअसल, यूपी की राजनीति में मजबूत मायावती भाजपा के लिए पिछले दस वर्षों में फायदेमंद रही थीं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा के खराब प्रदर्शन ने यूपी में भाजपा के वोट समीकरण को बिगाड़ दिया। दरअसल, मायावती का बिखरा वोट बैंक इंडिया ब्लॉक के पाले में चला गया। अब आठवले इस वोट की राजनीति की कमान मायावती को संभालने की बात करते दिख रहे हैं।
मायावती को सबसे उपयुक्त
रामदास आठवले ने एक इंटरव्यू में कहा है कि दलित समाज के सामने कई चुनौतियां हैं और बिखरे हुए स्वर अब एकजुट होने चाहिए। उन्होंने कहा मायावती के पास अनुभव भी है और बड़ी राजनीतिक ताकत भी। यदि दलित दल साथ आएं तो उनका नेतृत्व मायावती को करना चाहिए। उन्होंने माना कि बसपा सुप्रीमो को राष्ट्रीय राजनीति में एक अहम चेहरा मानकर ही दलित राजनीति को मजबूती दी जा सकती है।
दलितों की मौजूदा स्थिति पर चिंता
रामदास आठवले ने यह भी कहा कि संविधान ने दलित समाज को अधिकार और आरक्षण दिया है, लेकिन इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में भेदभाव और अन्याय की घटनाएं अब भी सामने आ रही हैं। उनका कहना था कि दलितों का बड़ा वर्ग अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस और भाजपा जैसे बड़े दलों में दलित नेताओं की मौजूदगी है, लेकिन दलित समाज की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज अब भी कमजोर है।
भाजपा के साथ गठबंधन पर सफाई
2016 में भाजपा के साथ गठबंधन करने के फैसले पर पूछे गए सवाल के जवाब में रामदास आठवले ने कहा कि मुझे लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दलित समाज के लिए काम करना चाहते हैं। उनकी सरकार ने दलितों के हित में कई योजनाएं चलाई हैं। उन्होंने अपनी साझेदारी को सकारात्मक और दलित हित में बताया। भाजपा के साथ गठबंधन को दलित-पिछड़ों के लिए उचित बताते वे दिखे।
सौजन्य : नवभारत टाइम्स
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