समाजवादी पार्टी अपनी नीयत और नीतियों में खामियों के कारण कभी भी दलितों की ‘सच्ची हितैषी’ नहीं हो सकती: मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने प्रतिद्वंद्वियों, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला और कहा कि कांग्रेस और भाजपा की तरह वह भी अपनी नीयत और नीतियों में खोट के कारण दलितों-बहुजनों की ‘सच्ची हितैषी‘ कभी नहीं बन सकती।
सपा के हमले के बीच मायावती ने दलितों को चेताया, बयानों को संकीर्ण स्वार्थ की राजनीति बताया
मायावती की यह आलोचना समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा पार्टी के दलित सांसद रामजी लाल सुमन को राणा सांगा पर उनकी टिप्पणी से जुड़े विवाद को लेकर लगातार समर्थन दिए जाने के बीच आई है।
X पर हिंदी में पोस्ट की एक श्रृंखला में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा की तरह समाजवादी पार्टी भी बहुजनों, खासकर दलितों को उनके संवैधानिक अधिकार देकर उनके उत्थान के लिए काम करने के बजाय उनकी गरीबी, जाति आधारित शोषण और अन्याय-अत्याचार को खत्म करने की इच्छाशक्ति नहीं रखती।
1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को याद करते हुए उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी द्वारा बसपा के साथ विश्वासघात, 2 जून (1995) को उसके नेतृत्व पर जानलेवा हमला, संसद में पदोन्नति में आरक्षण के बिल को फाड़ना, अपने संतों, गुरुओं और महापुरुषों के सम्मान में बनाए गए नए जिलों, पार्कों, शैक्षणिक और मेडिकल कॉलेजों का नाम बदलना ऐसे घोर जातिवादी कृत्य हैं जिन्हें माफ करना असंभव है।” उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बसपा जाति व्यवस्था को समाप्त करने और समतामूलक समाज बनाने के अपने मिशन में काफी हद तक सफल रही है। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए इसे हर तरह से बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।” उन्होंने लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया। मायावती ने कहा, “यह स्पष्ट है कि कांग्रेस और भाजपा समेत अन्य दलों की तरह समाजवादी पार्टी भी अपनी गलत नीयत और नीतियों के कारण दलितों-बहुजनों की सच्ची हितैषी कभी नहीं हो सकती, बल्कि वोटों की खातिर उन्हें धोखा देती रहेगी।” उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, बसपा बहुजन समाज को “शासक वर्ग” बनाने के लिए समर्पित है और संघर्ष कर रही है।
साभार : हिन्दू
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