दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट बहाल करने का आदेश दिया
सोशल मीडिया कैम्पेन कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट को 21 मई को ब्लॉक कर दिया गया था. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे बहाल करने का आदेश दिया. कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है|
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (7 जुलाई) को सोशल मीडिया कैम्पेन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का आदेश दिया|अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जताई गई चिंता अब प्रासंगिक नहीं रह गई है, क्योंकि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) (नीट-यूजी) की पुनर्परीक्षा खत्म हो चुकी है|जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया|
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि केंद्र सरकार की मुख्य चिंता यह थी कि इस अकाउंट की सोशल मीडिया पोस्ट नीट परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और अफरातफरी पैदा कर सकती थीं|
21 मई को सीजेपी का एक्स अकाउंट उस समय ब्लॉक कर दिया गया था, जब इंस्टाग्राम पर उसके 88 लाख (8.8 मिलियन) फॉलोअर्स हो गए थे. इसके साथ ही उसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 87 लाख (8.7 मिलियन) इंस्टाग्राम फॉलोअर्स को पीछे छोड़ दिया था|
इंडियन एक्सप्रेस ने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट किया था कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं’ जताए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई|
यह अकाउंट सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69(ए) के तहत ब्लॉक किया गया था. यह प्रावधान केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए वेबसाइटों, ऐप्स और सोशल मीडिया पोस्ट सहित ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच रोकने का अधिकार देता है|
सीजेपी का आंदोलन जारी
ज्ञात हो कि कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है. सीजेपी के सदस्यों में से एक जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.
शनिवार (4 जुलाई) को सीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर पूछा था कि सरकार उनकी आवाज़ को ‘आख़िर कब तक अनसुना करती रहेगी?’
पत्र में कहा गया था कि प्रधानमंत्री की चुप्पी इस बात की ‘मौन स्वीकृति’ है कि सरकार इस देश के युवाओं को ‘कीट-पतंगों (pests) से अधिक कुछ नहीं समझती, जिन्हें नज़रअंदाज़ किया जा सकता है.’
पत्र में आगे कहा गया, ‘जब तक यह गतिरोध जारी है, यह पत्र पढ़ने वालों और आपके प्रशासन को यह साफ तौर पर याद दिलाने का काम करे कि हम यहां क्यों बैठे हैं. हम इसलिए बैठे हैं क्योंकि आपकी सरकार बार-बार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने में विफल रही है, जिससे करोड़ों युवा भारतीयों का भरोसा और भविष्य दोनों प्रभावित हुए हैं.’
मालूम हो कि इस सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत 15 मई के सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ बताए जाने के बाद की गई थी|
सीजेआई सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकील का दर्जा दिए जाने की मांग संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि समाज में कुछ परजीवी हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. उन्हें रोज़गार नहीं मिलता और पेशेवर ज़िंदगी में कोई जगह नहीं मिलती. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं|
उन्होंने अकुछ बेरोजगार युवाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे ‘कॉकरोच’ जैसे हैं, जो आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं|
हालांकि, अपनी टिप्पणी के चलते चौतरफा आलोचना झेलने के बाद सीजेआई ने 16 मई को इस पर सफाई जारी करते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया|
सौजन्य :द वायर
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