क्या है उत्तराखंड का केतन हत्याकांड? 18 साल के दलित युवक की मौत पर पहाड़ से यूपी तक गर्माई सियासत
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में अंतर-जातीय प्रेम प्रसंग के चलते 18 वर्षीय दलित युवक केतन की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है।
उत्तराखंड का केतन हत्याकांड
देहरादून: उत्तराखंड के केतन हत्याकांड से पहाड़ से लेकर यूपी तक सियासत गरमाई हुई है। भीम आर्मी पीड़ित परिवार से मिलने के लिए टिहरी जाने की जिद में अड़े हैं। हरिद्वार में उत्तराखंड पुलिस ने बैरिकेडिंग कर कार्यकर्ताओं को रोका हुआ है।
नगीना सांसद और चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हरिद्वार से आगे बढ़ने के लिए कोशिश में जुटे हैं। सांसद चंद्रशेखर आजाद दो गाड़ियों के साथ हरिद्वार से आगे पहुंचे, लेकिन काफिले को हरिद्वार में शंकराचार्य चौक पर रोक दिया गया है।
अंतर-जातीय प्रेम प्रसंग के चलते दलित युवक की हत्या का आरोप
इससे पहले पीड़ित परिवार से मिलने के लिए टिहरी जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और खानपुर विधायक उमेश कुमार को समर्थकों के साथ कुछ दिन पहले भी पुलिस ने शंकराचार्य चौक पर रोका गया। घंटों हंगामे के बाद आईजी गढ़वाल ने फोन पर उन्हें पीड़ित परिवार से जल्द मिलाने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया तो वह लौट गए। लेकिन आज फिर वह समर्थकों के साथ फिर से पहुंच गए।
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में अंतर-जातीय प्रेम प्रसंग के चलते दलित युवक केतन की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है। आरोप है कि लड़की के परिजनों ने केतन को बंधक बनाकर बर्बरता की, जिससे उसकी मौत हो गई। केतन के परिजनों का आरोप है कि दूसरी जाति के लोगों ने उनके बेटे को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। यह मामला सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में भी खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। अब यह यूपी तक पहुंच गया है। उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने इस संबंध में गढ़वाल पुलिस से रिपोर्ट तलब कर चुका है।
क्या है केतन हत्याकांड
टिहरी जिले के लम्बगांव थाना क्षेत्र के देवल गांव निवासी 18 वर्षीय दलित केतन लाल का पड़ोसी गांव खोलगढ़ वल्ला की एक किशोरी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। किशोरी के परिजन इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। आरोप है कि परिजनों के दबाव में आकर किशोरी ने 7 जून की रात केतन को धोखे से अपने घर बुलाया। केतन अपने दोस्त दिवाकर डिमरी (22 वर्ष) के साथ वहां पहुंचा, किशोरी के पिता यशवीर सिंह पंवार और अन्य लोगों ने दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया और रातभर लाठी-डंडों से दोनों की बेरहमी से पिटाई की गई। इसके बाद केतन को अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने केतन की मौत से पहले एक वीडियो भी बनाया। इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने बौराड़ी जिला अस्पताल का घेराव किया और पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग को लेकर शुरुआत में अंतिम संस्कार के लिए शव लेने से इनकार कर दिया था। इस बीच उत्तराखंड सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए 8.25 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा भी की।पुलिस ने इस मामले के दो मुख्य संदिग्धों लड़की के पिता यशवीर सिंह और दादा विद्या सिंह को पहले गिरफ्तार किया। इसके बाद दो अन्य आरोपियों को भी सचिन पंवार और सुमित प्रसाद को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सौजन्य : नवभारत टाइम्स
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