डीएवी पब्लिक स्कूल आरटीआई के दायरे में नहीं हाईकोर्ट ने रद्द किया केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश
बिलासपुर, 19 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार (आरटी आई) अधिनियम की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि डीएवी पब्लिक स्कूल जैसी निजी और स्ववित्तपोषित शैक्षणिक संस्था को आरटीआई अधिनियम के तहत ‘पब्लिक अथॉरिटी ’ नहीं माना जा सकता । इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सी आईसी ) के उस आदेश को भी रद्द करदिया , जिसमें स्कूल को आरटीआई के दायरे में लाया गया था और प्राचार्य को ‘डिम्ड पीआईओ’ मानते हुए दंडि त किया गया था ।
मामला कोरबा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल का है। स्कूल प्रबंधन ने सी आईसी द्वारा पारित वि भिन्न आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं ।
मामले में एक कर्मचारी की सेवा समाप्ति की गई थी । कर्मचारी के परिजनों ने आरटीआई अधिनियम के तहत स्कूल के आंतरिक प्रशासन, सेवा संबंधी मामलों और अन्य जानकारियों की मांग की थी । इस पर केंद्री य सूचना आयोग ने स्कूल को आरटीआई के तहत जवाब देने का निर्देश दिया था ।
स्कूल प्रबंधन की ओर से तर्क दिया गया कि डी एवी पब्लि क स्कूल एक निजी संस्था है, जिसका संचा लन दया नंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसा यटी द्वारा किया जाता है। इसलिए इसे सरकारी संस्था या सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता ।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशो र प्रसाद की एकलपीठ ने की । अदा लत ने आरटीआई अधि नियम की धा रा 2(एच) सहित वि भिन्न कानूनी पहलुओं का परी क्षण कि या ।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि स्कूल अपनी आयफी स और अन्य निजी स्रोतों से अर्जितर्जि करता है। एसईसी एल के साथ उसका संबंध केवल एक संविदा त्मक व्यवस्था है, जिसके तहत एसईसीएल कर्मचारियों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई
जाती है। यदि किसी स्थिति में फीस की कमी होती है तो उसकी भरपाई की जाती है, लेकिन इसे ‘पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं माना जा सकता ।
हाईको र्ट ने कहा कि किसी संस्था को आरटीआई अधिनि यम के तहत ‘पब्लिक अथॉ रिटी ’ मानने के लिए उस पर सरकार का स्वामित्व, पर्याप्त वित्तीय सहायता या प्रशासनि क स्तर पर गहरा और व्यापक नियंत्रण हो ना आवश्यक है।
अदालत ने पाया कि डीएवी स्कूल के प्रबंधन, प्रशासन, नियुक्तियों यानी तिगत निर्णयों पर न तो राज्य सरकार और न ही को ईअन्य सरकारी निका य प्रत्यक्ष नियंत्रण रखता है। इसलिए इसे सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में शामिल नहीं किया जासकता ।
इन तथ्यों के आधार पर हा ईकोर्ट ने सी आईसी द्वारा स्कूल को आरटीआई के दायरे में लाने संबंधी आदेशों को निरस्त कर दिया । सा थ ही प्राचार्य को ‘डिम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (पी आईओ)’ घोषि त कर लगा ए गए दंडात्मक आदेश भी रद्द कर दिए गए।
सौजन्य :डेली छतीसगढ़
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