नीट को लेकर एक और आत्महत्या, रैली में राहुल गांधी बोले- भारतीय शिक्षा व्यवस्था वसूली तंत्र बन गई है
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में ‘छात्रों की गूंज’ नामक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत की शिक्षा व्यवस्था ‘बेहद तनावपूर्ण और अन्यायपूर्ण’ है. यह छात्रों और उनके परिवारों पर भारी बोझ डालती है. अवसर प्रदान करने के बजाय अधिकतर लोगों को बाहर कर देने वाली व्यवस्था के रूप में काम करती है|
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार (17 जून) को राजस्थान के कोटा में आयोजित एक रैली के दौरान भारत की शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि यह छात्रों और उनके परिवारों पर भारी बोझ डालती है तथा अवसर प्रदान करने के बजाय अधिकतर लोगों को बाहर कर देने वाली व्यवस्था के रूप में काम करती है|
‘छात्रों की गूंज’ नामक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि आज भारत की शिक्षा व्यवस्था ‘बेहद तनावपूर्ण और अन्यायपूर्ण’ है.
उन्होंने कहा, ‘भारत की शिक्षा व्यवस्था एक उगाही मशीन की तरह बन गई है. हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे.’
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था बच्चों पर बेवजह का दबाव और तनाव डालती है.
राहुल गांधी ने छात्र आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने हाल ही मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली नीट अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी आत्महत्या का जिक्र करते करते हुए कहा, ‘आकांक्षा डॉक्टर बनना चाहती थी. मैंने कुछ दिन पहले उसके पिता से बात की थी. उन्हें लकवा मार गया है. उन्होंने लोन लिया था. और आकांक्षा ने लिखा था – मैं आपके लिए आखिरी लाइन पढ़ता हूं: ‘सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया’…’
उन्होंने कहा कि इसमें न तो आकांक्षा की गलती थी और न ही उसके माता-पिता की. उन्होंने कहा, ‘भारत का शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर दबाव डालता है, उन्हें तनाव देता है, उन्हें दबाता और कुचलता है; और यह देश के लिए सही नहीं है. मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी दूसरा छात्र – इस भीड़ में मौजूद कोई छात्र हो या देश का कोई भी छात्र – कभी वैसा महसूस न करे जैसा उस लड़की ने किया था, या कभी खुदकुशी करने का ख्याल न लाए.’
कोटा को देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटरों का गढ़ माना जाता है|
कार्यक्रम में बोलते हुए गांधी ने कहा कि यह सभा उन छात्रों और युवाओं की चिंताओं पर केंद्रित है जो अपना भविष्य बनाने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘यह कोई राजनीतिक सभा नहीं है. यह आपके बारे में, उन युवाओं के बारे में बैठक है जो भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यह शाम आपके बारे में है, उन चुनौतियों के बारे में जिनसे आप हर दिन जूझ रहे हैं.’
पेपर लीक, बेरोज़गारी और परीक्षाएं
गांधी ने पेपर लीक, बेरोज़गारी और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों को उठाया. उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों को करियर के सीमित विकल्पों – खासकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और सिविल सेवा – की ओर धकेलती है, जबकि अन्य आकांक्षाओं के लिए कम समर्थन देती है.
उन्होंने नीट, जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई), यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन, स्टेट सर्विस कमीशन और रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड जैसी परीक्षाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि बहुत कम सीटों के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा करते हैं|
उन्होंने कहा, ‘अकेले नीट में लगभग 22 लाख छात्र शामिल होते हैं, लेकिन एक लाख से भी कम चुने जाते हैं. यह बहुत मुश्किल स्थिति है.’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्र और उनके परिवार परीक्षा से जुड़े खर्चों पर बहुत सारा पैसा खर्च करते हैं. उन्होंने कहा कि देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ नीट की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वह सरकार के कुल शिक्षा बजट के बराबर है|
व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए गांधी ने कहा कि छात्रों को उस स्तर के तनाव और दबाव का सामना नहीं करना चाहिए जो अभी कई युवा झेल रहे हैं|
छात्रों की बढ़ती आत्महत्याएं
यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हुआ है जब देश में छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं पर फिर से ध्यान केंद्रित हुआ है. नीट परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद से देशभर में कम से कम नौ छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या की है|
इस बीच, कोयंबटूर शहर में बुधवार को नीट की तैयारी कर रही 19 साल की एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली. छात्रा की पहचान कोवईपुदुर के पार्क टाउन की रहने वाली अनुकीर्तना के तौर पर हुई है|
उसके पिता सेंथिल प्रभु टस्मैक (Tasmac) ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू) के जिला सचिव हैं|
अनुकीर्तना मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने को लेकर उत्साहित थी, लेकिन कथित अनियमितताओं के कारण केंद्र सरकार ने नीट परीक्षा रद्द कर दी और 21 जून को पुनर्परीक्षा कराने की घोषणा की. बताया गया है कि इस घटनाक्रम से वह सदमे में आ गई और गहरे तनाव में चली गई|
बुधवार सुबह अनुकीर्तना ने अपने चाचा और अन्य करीबी रिश्तेदारों को एक लंबा और परेशान करने वाला वॉट्सऐप संदेश भेजा. उसमें उसने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा, ‘मैंने नीट परीक्षा दी थी और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का इंतजार कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द कर दी गई. अब मुझे दोबारा परीक्षा देने से डर लग रहा है. मेरे पिता ने मुझ पर बहुत पैसा खर्च किया है; मुझे नहीं पता कि मैं फिर उनका सामना कैसे कर पाऊंगी.’
सुबह यह संदेश पढ़ने के बाद रिश्तेदार तुरंत उसके घर पहुंचे. जब उन्होंने उसके कमरे का दरवाजा तोड़कर खोला, तो वह अचेत अवस्था में मिली. उसने ज़हर खा लिया था.
कुनियामुथुर पुलिस ने मामला दर्ज कर छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और जांच शुरू कर दी है|
इस बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की जिला समिति के सदस्यों ने ईएसआई अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया और नीट पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रा नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी थी और उसे बीडीएस में सीट मिल गई थी, लेकिन वह एमबीबीएस में प्रवेश पाने के लिए तैयारी कर रही थी.
रिश्तेदारों ने शव लेने से इनकार कर दिया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. बाद में राजस्व अधिकारियों द्वारा उनसे बातचीत किए जाने के बाद उन्होंने बुधवार रात शव स्वीकार कर लिया|
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं में 8.48 प्रतिशत हिस्सेदारी छात्रों की है. पिछले एक दशक में इसमें स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई है|
7 मई को जारी ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के शिक्षण परिसरों में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की. यह संख्या भारत में दर्ज कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है|
2014 के आंकड़ों से तुलना करने पर पता चलता है कि उस वर्ष 8,068 छात्र आत्महत्याएं हुई थीं, जो कुल आत्महत्याओं का 6.1 प्रतिशत थीं. पिछले आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर साल कम-से-कम 13,000 छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. 2021 में यह संख्या 13,089 थी, 2022 में 13,044 और 2023 में 13,892 रही|
परीक्षाओं को लेकर विवाद
पिछले कुछ महीनों से देश में परीक्षाओं के संचालन को लेकर पैदा हुए विवादों के कारण भी छात्रों के कल्याण का मुद्दा केंद्र में रहा है|
12 मई को आयोजित राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को कथित पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा आयोजित होने के दस दिन से भी कम समय बाद रद्द कर दिया गया था|
तुरंत बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) भी सुर्खियों में आया, जब कक्षा 12 के छात्रों ने मूल्यांकन में अनियमितताओं, उत्तर पुस्तिकाओं के मेल न खाने तथा नई ऑनलाइन मार्किंग प्रणाली से जुड़ी अन्य समस्याओं की शिकायत की.
इसी तरह सीयूईटी-यूजी परीक्षा भी मई में तकनीकी खामियों के कारण एक घंटे विलंब से शुरू हुई, जिसके चलते कई छात्र परीक्षा दिए बिना ही परीक्षा केंद्रों से लौट गए|
सौजन्य :द वायर
नोट: यह समाचार मूल रूप से https://thewirehindi.com/331242/indiaपर किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









