नए वोटर्स जोड़ने के लिए लगा अनूठा शिविर:मतदाता सूची में नाम जुड़वाने आगे आए ट्रांसजेंडर्स जुड़े, अब 40 वोटर्स होंगे
राज्य निर्वाचन आयोग नए वोटर्स जोड़ने का प्रयास कर रहा है। हर विधानसभा क्षेत्र में टारगेट भी दिए गए हैं। बीएलओ के जरिये शिविर भी लगाए जा रहे हैं। लेकिन यह संभवत: पहला मौका है जब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए मंगलवार को जोधपुर में ट्रांसजेंडर्स के लिए अनूठा शिविर लगाया गया।
ट्रांसजेंडर समुदाय खुद जागरूक हुआ और प्रशासन के सामने विशेष शिविर की मांग रखी थी। देश में मतदाता के तौर पर अपनी पहचान बनाने के लिए ट्रांसजेंडर्स जुटे। संभली ट्रस्ट ने इसके लिए कमान संभाली। अगले चुनाव में अब जोधपुर जिले में 3 नहीं बल्कि 40 से ज्यादा ट्रांसजेंडर वोटर्स होंगे।
ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही कांता बुआ बताती हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय एक भुलाया गया समुदाय है। समुदाय में मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। किसी भी तरह को सरकारी योजनाओं से वंचित है। ट्रांसजेंडर समुदाय को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पहला कदम एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति का पहचान पत्र है।
समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक अनिल व्यास ने हाथों हाथ सभी ट्रांसजेंडर समुदाय के व्यक्तियों के लिए कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी करवाई। सभी तरह का सहयोग देने का आश्वासन दिया। एडीएम द्वितीय राजेंद्र डांगा ने शिविर का निरीक्षण किया।
उन्होंने इस आयोजन के लिए कहा कि इससे आत्मसम्मान में बहुत मजबूती आएगी। ट्रस्टी वीरेंद्र सिंह चौहान, श्यामा तंवर एवं संभली ट्रस्ट संस्थापक गोविंद सिंह ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ट्रांसजेंडर समुदाय का धन्यवाद ज्ञापित किया।
पहले सिर्फ तीन वोटर
संभली ट्रस्ट की ओर से जब इस प्रकार की पहल नहीं की गई थी, उससे पहले जिले में महज तीन ट्रांसजेंडर वोटर थे। अब शिविर लगाकर जागरूकता फैलाई जा रही है। अब यह संख्या 40 के पार होगी। इसके अलावा ट्रांसजेंडर के अन्य समूह भी है, जो भी इस जागरूकता भरी पहले से जुड़ सकेंगे।
चिरंजीवी या अन्य योजना का लाभ तक नहीं
ट्रांसजेंडर समुदाय के किसी भी प्रकार के पहचान दस्तावेज नहीं होने के कारण, न तो ये वोट डाल पा रहे थे न ही आधार कार्ड बना था। मंगलवार को हुए शिविर में यह सभी पहचान दस्तावेज बनाए गए। जिससे इनको अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिल सके।
एफिडेविट लेकर बनवाया
कई ट्रांसजेंडर के पास कोई पहचान दस्तावेज नहीं था। इसी कारण उनका शपथ-पत्र बनवाया गया। साथ ही एक वोटर आईडी कार्ड के साथ ही क्रमांक में अन्य सदस्यों के मतदाता सूची में नाम जुड़वाए गए। अब अगले विधानसभा चुनावों में यह पहली बार वोट डालेंगे।
सौजन्य :दैनिक भास्कर
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