वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्य हुए शामिल, मध्य प्रदेश बना पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य
मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने नए संशोधित वक्फ कानून के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
नया अधिनियम आने के बाद देश में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन होना शुरू हो गया है। मप्र प्रदेश बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य बना है. नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया है. राज्य सरकार ने नवगठित बोर्ड में कुल 10 सदस्यों को शामिल किया गया है। इसमें से दो हिंदू सदस्य हैं।
बता दें कि वक्फ बोर्ड को नियंत्रित और संचालित करने वाला नया कानून वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 बना। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस कानून का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया। अब राज्यों में इस वक्फ बोर्ड का पुर्नगठन किया जाना है। मप्र में इसकी शुरुआत हो चुकी है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने नए संशोधित वक्फ कानून के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया। राज्य सरकार ने नए 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का गठन किया है। खास बात यह है कि इसमें पहली बार दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। बोर्ड के पुनर्गठन से जुड़ी अधिसूचना मध्य प्रदेश राजपत्र में भी प्रकाशित कर दी गई।
कौन हैं दो हिंदू?
राज्य सरकार ने अपनी तरह का पहला कदम उठाते हुए नवगठित 10 सदस्यीय बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया है। पुनर्गठन संबंधी अधिसूचना मध्य प्रदेश राजपत्र में प्रकाशित की गई है। सांवर पटेल को मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बोर्ड में शामिल दो हिंदू सदस्य इंदौर से मनोज मालपानी और गुना के राघोगढ़ से अनिमेष भार्गव हैं।
कैसे हिंदू बने सदस्य?
वक्फ अधिनियम, 1995 (संशोधित-2025) की धारा 13 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार ने अधिनियम की धारा 14 में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार बोर्ड का गठन किया। बोर्ड के नवनियुक्त सदस्यों में नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली), आतिफ अकील (विधायक भोपाल उत्तर), फैजान खान (उज्जैन), सिस्टर फातिमा चौधरी (इंदौर), शास्ता सुल्तान (पार्षद बेरेशिया भोपाल) और शबाना खान (पार्षद रतलाम) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण आयुक्त को भी सदस्य नियुक्त किया गया है।
2028 तक प्रभावी रहेंगी नजमा
अधिसूचना के अनुसार, नजमा हेपतुल्ला, जिन्हें अप्रैल 2023 में निर्वाचित श्रेणी से नियुक्त किया गया था, अपना कार्यकाल जारी रखेंगी क्योंकि उनका कार्यकाल 18 अप्रैल, 2028 तक प्रभावी है। उनके कार्यकाल की शेष अवधि के लिए उनका नाम नई अधिसूचना में शामिल किया गया है।
सौजन्य :न्यूज़ नेशन
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