रोजी-रोटी के लिए हजारों छात्रों ने बीच में छोड़ी पढ़ाई, शिक्षा विभाग के सर्वे में खुलासा
शिक्षा विभाग के सर्वे में मुजफ्फरपुर के 3,288 बच्चों के स्कूल छोड़ने का खुलासा. पलायन और आर्थिक तंगी प्रमुख वजह. विभाग ने काउंसेलिंग और विशेष नामांकन अभियान शुरू करने की तैयारी की है|
मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी स्कूलों से बच्चों का पढ़ाई छोड़ना फिर चिंता का विषय बन गया है. शिक्षा विभाग के सर्वे में खुलासा हुआ है कि नए सत्र 2026-27 में 3,288 बच्चों ने माध्यमिक स्तर तक पहुंचने से पहले ही स्कूल छोड़ दिया. सबसे बड़ी वजह आर्थिक तंगी, पलायन और परिवार की जिम्मेदारियां बताई गई हैं.
पलायन और आर्थिक तंगी बनी सबसे बड़ी वजह
शिक्षा विभाग के सर्वे में सामने आया है कि ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में परिवार दिल्ली, पंजाब, मुंबई और गुजरात जैसे राज्यों में रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं. ऐसे परिवारों के बच्चे भी पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं.
वहीं, कई बच्चे घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने के लिए खेत, दुकान या अन्य कामों में अपने पिता का सहयोग कर रहे हैं. कुछ मामलों में पिता की मृत्यु के बाद मजदूरी करने वाली मां बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है.
किस प्रखंड में सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट
• मीनापुर – 736
• मुशहरी – 496
• कांटी – 466
• मोतीपुर – 437
• बंदरा – 349
किन वर्गों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
सर्वे के मुताबिक, पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों में सबसे अधिक 1,852 बच्चे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं. अनुसूचित जाति वर्ग के 1,012, सामान्य वर्ग के 292 और अनुसूचित जनजाति के 132 बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है.
पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी चिंता
शिक्षा विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ड्रॉपआउट कम हो रहा था, लेकिन इस बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां बच्चों की पढ़ाई पर फिर असर डाल रही हैं.
बच्चों के लिए चलेगा विशेष अभियान
यदि किसी बच्चे ने पढ़ाई छोड़ दी है तो अभिभावक अपने नजदीकी सरकारी स्कूल, प्रखंड शिक्षा कार्यालय या जिला शिक्षा कार्यालय से संपर्क कर दोबारा नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. शिक्षा विभाग विशेष अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को स्कूल वापस लाने की तैयारी कर रहा है|
सौजन्य :प्रभात खबर
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