‘आउटसोर्स नौकरी नहीं, युवाओं के श्रम की लूट का नया मॉडल’ माले ने योगी सरकार को घेरा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरने की राज्य सरकार की नीति पर भाकपा (माले) ने तीखा हमला बोला है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम को युवाओं को रोजगार देने वाली संस्था के बजाय उनके श्रम के शोषण का माध्यम बताया है। माले ने निगम को भंग कर सरकारी विभागों में खाली पड़े सभी पदों पर स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की है। भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने आरोप लगाया कि योगी सरकार युवाओं को स्थायी रोजगार देने की अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली पड़े हैं और सरकार के पास राजस्व के पर्याप्त संसाधन हैं, इसके बावजूद नियमित नियुक्तियों के बजाय आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
लाखों सरकारी पद खाली, फिर भी स्थायी भर्ती से बच रही सरकार; माले बोली- आउटसोर्स सेवा निगम भंग कर रिक्त पदों पर हो नियमित नियुक्ति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरने की राज्य सरकार की नीति पर भाकपा (माले) ने तीखा हमला बोला है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम को युवाओं को रोजगार देने वाली संस्था के बजाय उनके श्रम के शोषण का माध्यम बताया है। माले ने निगम को भंग कर सरकारी विभागों में खाली पड़े सभी पदों पर स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की है। भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने आरोप लगाया कि योगी सरकार युवाओं को स्थायी रोजगार देने की अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली पड़े हैं और सरकार के पास राजस्व के पर्याप्त संसाधन हैं, इसके बावजूद नियमित नियुक्तियों के बजाय आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सुधाकर यादव के मुताबिक, सरकार का यह मॉडल युवाओं को रोजगार की सुरक्षा देने के बजाय कम वेतन और अस्थायी सेवा की ओर धकेलेगा। उन्होंने कहा कि स्थायी नियुक्ति की जगह आउटसोर्स भर्ती युवाओं को रोजगार का अधिकार देने के बजाय केवल सस्ता श्रम उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। ‘ठेका प्रथा को सरकारी ढांचे में संस्थागत करने की कोशिश’ माले नेता ने आरोप लगाया कि आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से सरकार ठेका प्रथा को संस्थागत रूप दे रही है। उनका कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों के बराबर काम लिया जाएगा, लेकिन उन्हें कम मानदेय, सेवा सुरक्षा और नियमित कर्मचारियों को मिलने वाले अन्य लाभों से वंचित रखा जाएगा। व्यवस्था भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और भाई-भतीजावाद की संभावनाओं को भी बढ़ा सकती है। ‘जब नियमित भर्ती में आरक्षण सुरक्षित नहीं तो आउटसोर्सिंग में क्या होगा?’
उन्होंने इसे युवाओं का आर्थिक शोषण बताते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग कीसुधाकर यादव ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण के सवाल को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब नियमित पदों पर होने वाली भर्तियों में ही आरक्षण को लेकर गंभीर विवाद सामने आते रहे हैं, तो आउटसोर्स भर्तियों में सामाजिक न्याय और आरक्षण की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने 69,000 शिक्षक भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि आरक्षण से जुड़े विवाद में प्रभावित अभ्यर्थी वर्षों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। माले का आरोप है कि सरकार ने अब तक उनके साथ न्याय नहीं किया है। पार्टी ने कहा कि आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए रोजगार का भ्रम पैदा करने के बजाय सरकार को पहले वर्षों से खाली पड़े नियमित सरकारी पदों को भरना चाहिए। माले नेता ने कहा कि रोजगार, आरक्षण और सामाजिक न्याय के सवालों को लेकर प्रदेश का युवा अब जागरूक है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका राजनीतिक जवाब देगा। भाकपा (माले) ने सरकार से आउटसोर्स सेवा निगम को भंग करने, ठेका प्रथा पर रोक लगाने और सभी रिक्त सरकारी पदों पर नियमित एवं स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की है।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









