महाराष्ट्र के जनरेशन जेड आदिवासी और अधिक की मांग कर रहे हैं
पुणे के बाहरी इलाके में स्थित मंजरी गांव में आदिवासी छात्र दो सप्ताह से अधिक समय से महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि सरकार ने वर्षों से उनकी बात नहीं सुनी है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार बेहतर शिक्षा और छात्रावास सुविधाओं की उनकी मांग पर ध्यान दिया जाएगा और नौ साल पहले सर्वोच्चन्यायालय द्वारा अनिवार्य रूप से दिए गए रोजगार का आश्वासन उन्हें दिया जाएगा।पंडित ने छात्रों से बात की, जिनमें से कई अपने परिवार में कॉलेज जाने वाले पहले व्यक्ति हैं।
महाराष्ट्र के मंजरी एसटी हॉस्टल के छात्र-छात्राएं लड़कों के सेक्शन के गलियारों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते महिला छात्र-छात्राएं रोजाना करीब 4 किलोमीटर का सफर तय करके विरोध स्थल तक पहुंच रही हैं। | फोटो साभार: विनया देशपांडे पंडित जब मीडिया के कैमरे 70-80 छात्रों के एक समूह पर केंद्रित हुए, जिनमें पुरुष बाईं ओर और महिलाएं दाईं ओर थीं,थीं तो उन्होंनेन्हों नेजोरदार विरोध जताया: “सरकार को शर्म आनी चाहिए! उसकी युवा पीढ़ी महारा ष्ट्र के जनरेशन जेड आदिवासी और अधिक की मांग कर रहे हैं|
चुपचाप पीड़ा सहती रही है, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाती रही है। और वे क्या कर रहे हैं? हमारी आवाज़ों को अनसुना कर रहे हैं। आदिवासी अब चुप नहीं रहेंगे। हम बिरसा मुंडा की संतान हैं, ”एक युवक ने मुट्ठी बांधते हुए कहा। “अगर हमारे उन भाई-बहनों को कुछ हुआ जो भूख हड़ताल पर हैं,तो इसके परिणाम भुगतने होंगे|
,” एक अन्य युवती ने कहा।
महाराष्ट्र के पुणे के बाहरी इलाके में स्थित मंजरी अनुसूचित जनजाति छात्रावास में लेटे छात्रों के स्वास्थ्य संबंधी मापदंडों की जांच करते समय चिकित्सा कर्मचारियों का एक समूह हस्तक्षेप करता है। धूल भरी चादरों से ढके सूती गद्दों पर सो रहे ये छात्र भूख हड़ताल पर हैं और जब उनसे सवाल पूछे जाते हैं तो वे अपनी सारी उर्जा जुटा लेते है |छात्रों का एक समूह उनके चारो ओर बैठा है और उनके कानो में उस प्रतिनिधिमंडल के बारे में फुसफुसा रहा है जो सरकार से बात करने के लिए रवाना हुआ है |नीले रंग के टेबल पंखे श्रतिज रूप से झुके है ,ताकि 14 दिनों से भोजन न करने के कारण कमजोर हो चुके लेटे छात्रों को राहत मिल सके |
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









