Umar Khalid Bail Hearing LIVE: ‘751 FIR में नाम नहीं, फिर भी उमर खालिद जेल में क्यों?’ कपिल सिब्बल की दलील
सुनवाई के दौरान उमर खालिद के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि 751 FIRs में वे किसी में आरोपी नहीं हैं. SC में याचिकाएं दायर कर खालिद के अलावा शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, शिफा-.
दिल्ली के 2020 उत्तर-पूर्वी दंगों से जुड़े ‘बड़ी साजिश’ केस में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ अग्रवाल ने जोरदार बहस की. कपिल सिब्बल ने उमर खालिद की ओर से दलील दी कि 2020 के दंगों से जुड़े कुल 751 एफआईआर दर्ज की गई थीं. सिब्बल ने कहा, ‘मैं उनमें से किसी में भी आरोपी नहीं हूं. जिन मामलों में मेरा नाम था, वहां से दिसंबर 2022 में मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया. अब मैं सिर्फ तथाकथित साजिश वाले केस में आरोपी हूं.’ कोर्ट ने तमाम दलीलें सुनने के बाद सुनवाई 06 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है. देखिए, आज की सुनवाई के दौरान दी गई दलीलें:
सिब्बल ने कहा कि ‘751 में से 116 केसों का ट्रायल खत्म हो चुका है, जिनमें से 97 मामलों में आरोपी बरी हुए हैं. इनमें से 17 मामलों में दस्तावेजों की फर्जीवाड़े की बात सामने आई.’ इस पर जस्टिस कुमार ने पूछा, ‘आपका इससे क्या लेना-देना?’ सिब्बल ने जवाब दिया, ‘मैं बस तथ्य बता रहा हूं.’ वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने इसे ‘प्रीजुडिस क्रिएट करने की कोशिश’ बताया.
इसके बाद वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने शिफा-उर-रहमान की ओर से बहस करते हुए कहा कि ‘वियतनाम वॉर के दौरान अमेरिका में ‘शिकागो-7′ ट्रायल हुआ था. किसी कानून से असहमति रखना अपराध नहीं हो सकता. अगर कोई शांति से विरोध कर रहा है, तो उसे साजिश कहना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है.’ उन्होंने कहा कि रहमान के खिलाफ हिंसा में शामिल होने का कोई सबूत नहीं है|
खुर्शीद ने कहा कि ‘दिसंबर 2019 में जामिया में हुई पुलिस कार्रवाई के वक्त भी वह किसी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं थे. उन्हें चुनकर आरोपी बनाया गया है. UAPA की किसी धारा के तहत कोई ठोस सबूत नहीं है. चार्जशीट में लिखा है कि वे जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य थे, लेकिन उन्हें बोलने या बैठक में अध्यक्षता करने की अनुमति तक नहीं थी.’
खुर्शीद ने आगे कहा कि ‘जांच में मेरे खिलाफ केवल दो बयान हैं, जो गिरफ्तारी से पहले ही दर्ज किए गए थे. न किसी गवाह ने कहा कि मैंने हिंसा के लिए उकसाया, न कोई अवैध गतिविधि की. कम से कम पैरिटी (समानता) के आधार पर तो मुझे जमानत मिलनी ही चाहिए, क्योंकि हाईकोर्ट ने तीन अन्य आरोपियों को इसी केस में जमानत दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा.’
उन्होंने यह भी कहा कि रहमान को दो बार अंतरिम जमानत मिली थी और हर बार उन्होंने अदालत के आदेश का पालन करते हुए खुद सरेंडर किया. खुर्शीद ने गांधी के सिद्धांतों का जिक्र करते हुए कहा, ‘अगर कोई कानून अन्यायपूर्ण है, तो उसका शांतिपूर्ण विरोध हमारा नैतिक दायित्व है.’
वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने मीरान हैदर के लिए कहा कि ‘प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक 1.6 करोड़ का खर्च बताया गया, जिसमें से मुझ पर सिर्फ 2 लाख खर्च करने का आरोप है. यह आरोप हास्यास्पद है. हाईकोर्ट ने इसी केस में तीन आरोपियों को जमानत दी थी, और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा था.’
दिल्ली दंगा केस में अब सुप्रीम सुनवाई 6 को
दिल्ली दंगा साजिश केस में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जोरदार बहस हुई. केंद्र ने कहा कि कुछ आरोपी एक दिन की भी रिहाई के लायक नहीं, जबकि बचाव पक्ष ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया. कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं. अदालत ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद केस की अगली सुनवाई 6 नवंबर को तय की|
दिल्ली हिंसा केस LIVE: अग्रवाल बोले – शरजील इमाम से दूरी बनाई थी, साजिश का आरोप झूठा
सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल ने मीरान हैदर की ओर से कोर्ट में कहा कि उन पर लगे आरोप पूरी तरह झूठे हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद ट्वीट कर शरजील इमाम से दूरी बनाई थी और कहा था कि उसे किसी भी प्रोटेस्ट में शामिल नहीं किया जाए. अग्रवाल ने कहा कि वह किसी भी दंगे की जगह पर मौजूद नहीं थे और कोई सीसीटीवी फुटेज भी यह साबित नहीं करता. उन्होंने कहा कि जिस सीक्रेट मीटिंग की फोटो पेश की गई है, उसमें उनकी मौजूदगी नहीं है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि फोटो क्लिक करने वाला व्यक्ति दिख ही नहीं रहा. अग्रवाल ने बताया कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और चार्जशीट में भी उनका नाम नहीं है.
‘5 साल से जेल में हूं, सिर्फ 2 लाख का आरोप’, मीरान हैदर की जमानत सुनवाई में वकील अग्रवाल का तर्क
आरोपी मीरान हैदर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कोर्ट में कई अहम दलीलें दीं|
अग्रवाल ने कहा कि ‘प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक कुल खर्च 1.6 करोड़ बताया गया है, जिसमें मेरे खिलाफ सिर्फ 2 लाख रुपये खर्च करने का आरोप है. यह आरोप बेहद मामूली है.’
उन्होंने कहा कि ‘मेरे बैंक अकाउंट में सिर्फ 80 हजार रुपये आए थे और नकद 4.5 लाख मिले बताए गए हैं, जिसमें से सिर्फ 2 लाख खर्च करने की बात कही गई है. ऐसे में मुझे साजिश का हिस्सा बताना बेमानी है.’
अग्रवाल ने दलील दी कि ‘2021 में इसी केस में तीन आरोपियों – जिनमें आसिफ इकबाल तन्हा भी शामिल थे – को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दी थी. वही केस, वही आरोप, वही साजिश. सुप्रीम कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा और स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) खारिज कर दी.’
उन्होंने कहा कि ‘मेरी भूमिका उनसे काफी हल्की थी, फिर भी मुझे अब तक राहत नहीं मिली. मैं 1 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार हुआ था और अब तक 5 साल 7 महीने जेल में बीत चुके हैं.’
अग्रवाल ने बताया कि ‘मुझे अंतरिम जमानत दी गई थी और मैंने हर बार तय समय पर सरेंडर किया. मैंने कभी गवाहों को धमकाया नहीं, न सबूतों से छेड़छाड़ की.’
उन्होंने कहा कि ‘प्रॉसिक्यूशन ने अब तक यह स्वीकार नहीं किया कि मेरे खिलाफ जांच खत्म हो चुकी है. आखिरी चार्जशीट में भी लिखा है कि जांच जारी है.’
अग्रवाल ने अंत में कहा कि ‘जब समान आरोप वाले तीन लोगों को जमानत मिल चुकी है, तो पैरिटी (समानता) के आधार पर मुझे भी जमानत दी जानी चाहिए. इतने सालों तक जेल में रहना अपने आप में सजा बन चुका है.’
सौजन्य :न्यूज़ 18
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